धनबाद से शोभित रंजन की रिपोर्ट
Womens Day Special: झारखंड के धनबाद जिले के बलियापुर प्रखंड स्थित बेड़ा नियामतपुर गांव की रहने वाली पूनम कुमारी ने मुर्गी पालन के माध्यम से महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है. एक साधारण गृहिणी से सफल उद्यमी बनने तक की उनकी यात्रा संघर्ष, आत्मविश्वास और मेहनत की कहानी है.
छोटी शुरुआत, बड़ा सपना
पूनम कुमारी पति उत्तम कुमार ने साल 2020 में मुर्गी पालन व्यवसाय की शुरुआत की. उस समय उनके पास पूंजी नहीं थी. उन्होंने मात्र छह हजार रुपये से अपने घर की छत पर ही मुर्गी पालन शुरू कर दिया. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे इस छोटे प्रयास को बड़े व्यवसाय में बदल दिया.
साधारण फार्म से बढ़ाया व्यवसाय
शुरुआत में मुर्गी फार्म बनाने के लिए भी पैसे नहीं थे. बाद में 50 हजार रुपये का लोन लेकर बांस, प्लास्टिक और बिचाली की मदद से एक साधारण पोल्ट्री फार्म तैयार किया. यहीं से एक सफल मुर्गी पालक महिला किसान का सफर आगे बढ़ा. कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने लगातार मेहनत कर व्यवसाय को विस्तार दिया.
यूट्यूब के माध्यम से किसानों को जोड़ा
पूनम कुमारी ने मुर्गी पालन से जुड़ी अपनी दिनचर्या, समस्याएं और उनके समाधान को यूट्यूब के माध्यम से साझा करना शुरू किया. उनकी सटीक और उपयोगी जानकारी से हजारों किसान जुड़ते चले गए. आज उनके साथ करीब 80 हजार किसान जुड़े हैं और वे इस बड़े नेटवर्क का नेतृत्व कर रही हैं.
देश-विदेश तक पहुंचा व्यवसाय
मुर्गी पालन के इस व्यवसाय ने उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया. आज उन्होंने मुर्गी पालन से कमाई कर लगभग 23 हजार वर्गफीट जमीन खरीद कर अपना पोल्ट्री फार्म बनाया है. झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ समेत देश के कई राज्यों तक उनका नेटवर्क फैल चुका है. वहीं, विदेशों से भी लोग उनके संपर्क में हैं.
मोबाइल ऐप लॉन्च कर बनाई नई पहचान
पूनम कुमारी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि उन्होंने मुर्गी पालन से जुड़ी जानकारी और किसानों को जोड़ने के लिए खुद का मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च किया है. इस क्षेत्र में ऐसा करने वाली वह देश की पहली महिला किसान मानी जा रही हैं.
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महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
पूनम कुमारी की सफलता की कहानी केवल एक व्यवसाय की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल है, जिसने समाज की सोच को बदल दिया. उनकी उपलब्धियां देशभर की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभर रही हैं और यह साबित करती हैं कि दृढ़ संकल्प के साथ कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है.
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