खूंटी : जिन गांवों में विवादित पत्थलगड़ी की गयी, वहां की ग्रामसभा अपनी ही सरकार चला रही है़ सरकारी दस्तावेजों को आदिवासी विरोधी बताते हुए अब ग्रामसभा द्वारा लोगों को बैक डेट से प्रमाणपत्र जारी किया जा रहा है़ प्रमाणपत्र में अशोक स्तंभ का प्रयोग किया जा रहा है़ इसके ऊपरी हिस्से में ए/सी भारत सरकार कुटुंब परिवार आदिवासी पारंपरिक रुढ़ि प्रथा प्राकृतिक ग्रामसभा अंकित किया गया है़
इसके अलावा विल्किंसन रूल, लैंड रिवेन्यू रूल, गांधी इरविन एक्ट, भारत शासन अधिनियम, मुंडारी खूंटीखटी(वर्जित क्षेत्र), सीएनटी एक्ट-एसपीटी एक्ट, भारत का संविधान, मूल अधिकार अनुच्छेद 13(3)क, पांचवी अनुसूची 244(1) आदि भी अंकित की गयी है.
हालांकि जो पता दिया गया है, वह सरकारी व्यवस्था के अनुसार ही दिया गया है व प्रमाणपत्र में ए/सी भारत सरकार कुटुंब परिवार अंकित कर हातु मुंडा का मुहर भी लगाया गया है़ प्रमाणपत्र को सभी कार्यों में उपयोग हेतु निर्गत किया गया है़
प्रमाणपत्र के नीचे नोट कॉलम भी दिया गया है़ जिसमें लिखा गया है कि केंद्र सरकार या राज्य सरकार अथवा गैर सरकारी संस्थाओं को हातु मुंडा, ग्राम प्रधान द्वारा जारी किये गये इस प्रमाणपत्र पर आपत्ति है, तो नाम, पता, पदनाम, हस्ताक्षर व मोहर के साथ लिखित रूप से आपत्ति दें.
इधर ग्रामीणों के बीच ग्रामसभा द्वारा जारी प्रमाणपत्र के उपयोग को लेकर संशय की स्थिति है. ग्रामीण इसका किसी सरकारी कार्य में उपयोग करने जा रहे हैं, तो उसे स्वीकार नहीं किया जा रहा है़ पिछले दिनों स्कूल में नामांकन व सेना की बहाली में गये युवाओं को वापस लौटना पड़ा है़
