भू-सर्वे, जमीन की ऑनलाइन रसीद काटने विषय पर भी चर्चा
खूंटी : आदिवासी समाज नयी किस्म की पत्थलगड़ी के खिलाफ मुखर होने लगा है. मंगलवार को आदिवासी भू-रक्षा व सुधार समिति ने सोयको बाजारटांड़ में सभा आयोजित की. जिसमें विवादित पत्थलगड़ी के साथ-साथ प्रस्तावित भू-सर्वे व जमीन की ऑनलाइन रसीद काटे जाने को लेकर चर्चा की गयी.
ग्रामीणों ने कहा कि वर्तमान में जो पत्थलगड़ी की जा रही है, उससे भ्रम की स्थिति है़ इस भ्रम को वार्ता के माध्यम से ही दूर किया जा सकता है़ समिति के सचिव भोला पहान ने कहा कि अभी जो पत्थलगड़ी की जा रही है, उसमें अशोक स्तंभ का चिह्न अंकित है. यह किसके नाम से गाड़ा गया है, समझ से परे है़
मार्शल बारला ने कहा कि वर्तमान पत्थलगड़ी को आदिवासी समाज के पढ़े-लिखे लोग स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. इससे समाज में भ्रम की स्थिति बढ़ गयी है़ जिउरी के ग्राम प्रधान बिनसाय मुंडा ने कहा कि हम पत्थलगड़ी के विरुद्ध नहीं हैं, लेकिन बच्चों को स्कूल नहीं भेजने व सरकारी लाभ नहीं लेने से समाज के लोगों को ही नुकसान हो रहा है. समिति के पूर्व अध्यक्ष जोहन नाग ने कहा कि उन्होंने बुद्धिजीवियों व वकीलों से इस संबंध में पूछा, तो सभी ने कहा कि नयी किस्म की पत्थलगड़ी पूरी तरह असंवैधानिक है़ हम पारंपरिक रूप से पत्थलगड़ी करते रहे हैं, उसमें कभी भी विवाद नहीं हुआ. सभा में में जेम्स नाग, लुुकिन मुंडा, लड़कन मुंडा, प्रभु सहाय सोय सहित अन्य उपस्थित थे़
भू-सर्वे के आधार को लेकर डीसी से मिलने का निर्णय : सभा में प्रस्तावित भू-सर्वे को लेकर भी चर्चा की गयी. वक्ताओं ने कहा कि भू-सर्वे किस आधार पर होगा, इसकी पूरी जानकारी ली जायेगी़ आदिवासी समाज को होनेवाले लाभ व नुकसान को समझने के बाद ही ग्रामीण इसके लिए तैयार होंगे़
सभा में इस विषय पर एक प्रतिनिधिमंडल का गठन कर डीसी से मिलने का निर्णय लिया गया. कंप्यूटर द्वारा जमीन से ऑनलाइन रसीद काटे जाने का भी विरोध किया गया़ वक्ताओं ने कहा कि जमीन की पूरी जानकारी कंप्यूटर में दर्ज नहीं है़ ऑनलाइन रसीद में कई त्रुटियां हैं.
इस रसीद को सरकारी कार्यों में भी उपयोग नहीं कर सकते हैं. ग्रामीणों ने ऑनलाइन खतियान का भी विरोध किया़. कहा कि ऑनलाइन खतियान में चौहद्दी नहीं दी गयी है़ इससे जमीन की सही जानकारी नहीं मिल पाती है़
