झारखंड में शराब कारोबारियों ने लगाई ऊंची बोली, बिक्री घटी तो मांग रहे लाइसेंस फीस में छूट

Jharkhand Liquor Sale: झारखंड में शराब कारोबारियों ने ऊंची बोली और बढ़े टैक्स के कारण घाटे का हवाला देते हुए लाइसेंस फीस में छूट की मांग की है. कम बिक्री, भारी स्टॉक और घटते मुनाफे से दुकानदार परेशान हैं. कई ठेकेदार दुकानें सरेंडर कर रहे हैं, जिससे सरकार के राजस्व पर असर पड़ सकता है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

Jharkhand Liquor Sale: झारखंड में ऊंची बोली लगाकर शराब बेचने का ठेका लेने वाले खुदरा शराब कारोबारी अब घाटे के चलते सरकार से लाइसेंस फीस में राहत और टैक्स छूट की मांग कर रहे हैं. सूबे में न्यूनतम गारंटीकृत मात्रा राजस्व (एमजीक्यूआर) में 10% की वृद्धि के कारण रिटेल वाइन शॉप से जुड़े विक्रेता दबाव में हैं. ज्यादातर जगहों पर मार्जिन कम होने के कारण इसे वापस लेने की मांग उठी है.

दुकान सरेंडर या बंद करने पर मजबूर ठेकेदार

झारखंड वाइन रिटेलर्स एसोसिएशन ने नए वित्तीय वर्ष के पहले सरकार से राहत की मांग की है. एसोसिएशन ने कहा कि रिटेलर्स के पास इस समय करोड़ों रुपये का बिना बिका स्टॉक पड़ा है. एसोसिएशन ने कहा कि ऊंची लाइसेंस फीस और कम मार्जिन के कारण कई ठेकेदार दुकान बंद करने या सरेंडर करने पर मजबूर हैं. बड़ी संख्या में शराब कारोबारियों ने कम बिक्री का हवाला देकर सरकार से टैक्स घटाने की मांग की है.

रांची में अनुमान के मुकाबले बिक्री घटी

झारखंड वाइन रिटेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीरेंद्र प्रसाद साहू ने कहा कि रांची में ही दुकानों में अनुमान के मुकाबले कम बिक्री हो रही है. सरकार चाहे तो सभी दुकानों का एक सैंपल सर्वे करे, जिससे स्टॉक और सेल्स को लेकर उन्हें वास्तविक जानकारियां प्राप्त हो सके. पहले रेस्टोरेंट-बार को शराब दुकानों से टैग कर इसकी बिक्री की जाती थी. इसे हटा देने के चलते मांग की वृद्धि दर कम होकर काफी न्यूनतम रह गई है. पदाधिकारी अजय साहू और उपाध्यक्ष अनुराग चावला ने संयुक्त रूप से कहा कि तय कोटे में कमी और शर्तों में लचीलापन लाकर विभाग को प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक बनाने की कोशिश करनी चाहिए.

भारी-भरकम उत्पाद शुल्क से घटा मुनाफा

बाजार में सुस्ती के कारण मासिक निर्धारित स्टॉक उठाने में इस समय करीब 40 दिन लग रहे हैं. एसोसिएशन का कहना है कि रिटेलर्स द्वारा गलत अनुमान और राज्य सरकार द्वारा ऊंची बिक्री कर तय किए जाने से बिक्री पर उल्टा असर पड़ा है. इस मांग का उद्देश्य कारोबार को गति देना और बिक्री बढ़ाना है, क्योंकि भारी भरकम उत्पाद शुल्क से मुनाफा घट गया है.

नकली शराब की आपूर्ति बढ़ी

उन्होंने कहा कि उत्पाद विभाग पहले से ही कर्मचारियों और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है. ऐसे में उच्च करों के कारण वैध शराब की बिक्री में कमी और गैर-पारंपरिक और अवैध तरीकों से नकली शराब की आपूर्ति बढ़ सकती है. रिटेलर्स का कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में ऊंची बोली लगाना जोखिम भरा है, लेकिन अब 10% तक की छूट मिलने से निवेश का दबाव कम होगा और नए प्रतिभागी बाजार में टिक नहीं रह सकेंगे. यदि बड़ी संख्या में दुकानें खाली रह जाती हैं, तो इसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ेगा.

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नियमों को युक्तिसंगत बनाने की मांग

2025-26 में भारी टैक्स और मार्च में कई त्योहार के कारण शराब की मांग में गिरावट देखी गई, जिससे कंपनियों का राजस्व प्रभावित हुआ है. एसोसिएशन अपेक्षाकृत अधिक कीमत और कुछ सख्त शर्तों के कारण टैक्स में कटौती करने की मांग कर रहा है. स्थानीय शराब कारोबारियों का मानना है कि विभाग को रिटेलर्स के हित में व्यावहारिक कदम उठाने चाहिए. वाइन शॉप का सर्वे कर नियमों को नये सिरे से युक्तिसंगत बनाने की जरूरत है. पूरे झारखंड में 38 संचालकों ने दुकान सरेंडर कर दिया है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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