Household Expenditure Survey: झारखंड में हर महीने लोगों के खान-पान खर्च पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है. मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक की ओर जारी किए गए हाउसहोल्ड कंजम्शन एक्सपेडिंचर सर्वे के अनुसार, झारखंड में चार मेंबर वाले एक परिवार का हर महीने खान-पान खर्च करीब 7,260 रुपये है. यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले करी 2,000 रुपये अधिक है. इसके बावजूद, झारखंड पूरे देश में नीचे से दूसरे स्थान पर बना हुआ है.
उत्तर प्रदेश सबसे नीचे, झारखंड दूसरे नंबर पर
पूरे देश में खान-पान पर सबसे कम खर्च करने वाला स्टेट उत्तर प्रदेश है, जहां चार लोगों के परिवार का खाने-पीने पर हर महीने करीब 7,040 रुपये खर्च होते हैं. झारखंड 7,260 रुपये के साथ ठीक उसके ऊपर है. यह खर्च बिहार (7,700 रुपये) और ओडिशा (7,480 रुपये) के मुकाबले काफी कम है. इससे यह साफ है कि ईस्ट इंडिया के स्टेट्स में खाने-पीने पर होने वाला खर्च अभी भी कम है.
नॉर्थ और साउथ इंडिया में बड़ा डिफरेंस
मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक के सर्वेक्षण में यह भी सामने आया है कि नॉर्थ और साउथ इंडिया के स्टेट्स में राशन और खान-पान पर होने वाले खर्च में बड़ा डिफरेंस है. जहां नॉर्थ इंडिया के कई स्टेट्स निचले दर्जे पर हैं, वहीं साउथ और यूनियन टेरिटरी में खान-पान पर खर्च काफी ज्यादा देखा गया है. यह अंतर केवल इनकम का नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल, अर्बनाइजेशन और खाने-पीने की आदतों की ओर एक इशारा भी है.
चंडीगढ़ सबसे ऊपर, दिल्ली दूसरे स्थान पर
देश में खानपान पर सबसे अधिक खर्च करने वाले स्टेट्स में यूनियन टेरिटरी चंडीगढ़ टॉप पर है, जहां एक परिवार महीने में करीब 14,850 रुपये खाने-पीने पर खर्च कर देता है. यह उत्तर प्रदेश के मुकाबले करीब दोगुना है. वहीं, दिल्ली दूसरे स्थान पर है, जहां यह खर्च करीब 14,124 रुपये मंथली है. यह आंकड़े दिखाते हैं कि शहरी और डेवलप्ड एरिया में फूड आइटम्स पर खर्च काफी अधिक है.
अधिक खर्च करने वाले दूसरे राज्य
चंडीगढ़ और दिल्ली के अलावा केरल (12,200 रुपये), गोवा (11,660 रुपये) और पंजाब (11,352 रुपये) भी उन स्टेट्स में शामिल हैं, जहां खान-पान पर एवरेज खर्च काफी अधिक है. इन स्टेट्स में पर कैपिटा इनकम, कंजम्प्शन कैपिसिटी और प्रोसेस्ड व रेडी-टू-ईट फूड की खपत ज्यादा मानी जाती है.
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झारखंड के लिए क्या है इंडिकेशन
झारखंड में खान-पान पर कम खर्च यह संकेत देता है कि यहां बड़ी आबादी आज भी लिमिटेड इनकम और मिनिमम कंजम्प्शन पर निर्भर है. हालांकि, पिछले साल के मुकाबले बढ़ोतरी पॉजिटिव इंडिकेट देती है, लेकिन नेशनल एवरेज और डेवलप्ड स्टेट के मकाबले यह अंतर अभी भी काफी बड़ा है. विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में जॉब, अर्बनाइजेशन और इनकम में सुधार के साथ यह डेटा बढ़ सकता है.
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