Godda-Pirpainti Railway Line Alignment: झारखंड हाइकोर्ट ने गोड्डा-पीरपैंती नयी ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण एवं एलाइनमेंट बदलने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. चीफ जस्टिस एमएस सोनक व जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद प्रार्थियों को राहत देने से इनकार कर दिया तथा जनहित याचिका को खारिज कर दिया.
30 दिन में आपत्ति नहीं, याचिका खारिज
खंडपीठ ने गोड्डा-पीरपैंती रेलवे लाइन का एलाइनमेंट बदलने का आदेश देने से भी इनकार कर दिया. खानपेट ने आज का खाली करते हुए जमीन अधिग्रहण से संबंधित नौ दिसंबर 2025 की अधिसूचना को रद्द नहीं किया. कहा कि प्रार्थीगण यह साबित नहीं कर सके कि रेलवे अधिनियम की धारा 20-डी के तहत निर्धारित 30 दिनों की अवधि में सक्षम प्राधिकारी के समक्ष विधिवत आपत्ति दर्ज की गयी थी. हालांकि खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि याचिका खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि रेलवे अधिकारी ग्रामीणों की ओर से एलाइनमेंट बदलने के अनुरोध पर विचार नहीं कर सकते. यदि ऐसा बदलाव व्यवहारिक और उचित पाया जाता है, तो रेलवे अधिकारी उस पर विचार करने के लिए स्वतंत्र हैं.
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ग्रामीणों ने एलाइनमेंट बदलने की मांग की थी
खंडपीठ ने साथ ही स्पष्ट किया कि उसने रेलवे को ऐसा करने का कोई निर्देश नहीं दिया है. खंडपीठ ने उक्त फैसला अशोक कुमार साह व अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनाया. प्रार्थियों ने याचिका में 9 दिसंबर 2025 की अधिसूचना को चुनौती देते हुए कहा था कि गोड्डा के मेहरमा प्रखंड के ग्रामीणों की जमीन रेलवे लाइन परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही है. ग्रामीणों की आपत्तियों पर विचार करने व एसआरटी कॉलेज के पास प्रस्तावित रेल लाइन के एलाइनमेंट को 400 से 750 मीटर पूर्व की ओर करने की मांग की थी, ताकि कम से कम आबादी प्रभावित हो.
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