रांची. झारखंड हाइकोर्ट ने तलाक के बाद पूर्व पत्नी से दोबारा निकाह से इनकार से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी की है. जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने कहा कि तलाकशुदा पत्नी के हलाला के बाद पूर्व पति का उससे दोबारा निकाह करने से इनकार अपने आप में कोई संज्ञेय अपराध या कानूनी गलती नहीं है. अदालत ने इसी मामले में इमरान हुसैन की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उसे राहत प्रदान की है.
अदालत ने प्रार्थी को तीन सप्ताह के भीतर संबंधित निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया. सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह मामला रखा गया कि प्रार्थी और महिला के बीच पहले पति-पत्नी का संबंध था, लेकिन बाद में दोनों का तलाक हो गया. इसके बाद महिला ने किसी अन्य व्यक्ति से निकाह कर लिया था.
दोबारा निकाह के लिए बाध्य करने का कानूनी आधार नहीं
अदालत ने मामले के तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करते हुए कहा कि जब तलाक हो चुका हो और महिला ने दूसरी शादी कर ली हो, तब पूर्व पति के दोबारा निकाह से इनकार मात्र को आधार बनाकर उसके खिलाफ नया आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता. अदालत ने यह भी कहा कि उपलब्ध कानूनी प्रावधानों में ऐसी व्यवस्था नहीं है, जिसके तहत केवल पूर्व पति के दोबारा निकाह से इनकार करने के आधार पर उसे शादी के लिए बाध्य किया जा सके.
अदालत की टिप्पणी इस मामले में दर्ज प्राथमिकी और उसके आधार पर मांगी गयी अग्रिम जमानत से जुड़ी थी. इसे किसी धार्मिक प्रथा को लेकर अदालत की सामान्य मान्यता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
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2020 में भी दर्ज हुई थी प्राथमिकी
सुनवाई के दौरान इमरान हुसैन की ओर से अदालत को बताया गया कि महिला ने इससे पहले वर्ष 2020 में धनवार थाना में कांड संख्या 405/2020 के तहत प्राथमिकी दर्ज करायी थी. बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था.
प्रार्थी की ओर से यह भी बताया गया कि इसके बाद दोनों के बीच तलाक हो गया और महिला ने किसी अन्य व्यक्ति से शादी कर ली. इसके बावजूद बाद में धनवार थाना में कांड संख्या 314/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी. यह मामला शिकायत वाद संख्या 684/2025 से उत्पन्न हुआ था.
इन धाराओं में दर्ज हुआ था मामला
मौजूदा प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के अलावा दहेज प्रतिषेध अधिनियम और मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत प्रावधान लगाये गये थे. इसी मामले में गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए इमरान हुसैन ने हाइकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी.
अदालत ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अग्रिम जमानत की सुविधा प्रदान कर दी. कोर्ट के आदेश के अनुसार प्रार्थी को निर्धारित अवधि के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करना होगा.
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