बिंदापाथर. फतेहपुर प्रखंड के पुतुलजोड़ गांव में मंगलवार को आदिवासी समाज के अटूट आस्था का प्रतीक ”माअ मोड़े पूजा” बड़े ही धूमधाम से संपन्न हुई. पांच वर्षों के अंतराल पर आयोजित होने वाले इस विशेष अनुष्ठान को लेकर पूरे गांव में उत्सवी माहौल व्याप्त था. गांव के मुंशी हेंब्रम ने इस पूजा के ऐतिहासिक महत्व बताया. बताया कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसे पूर्वजों के बाद अब वर्तमान पीढ़ी पूरी श्रद्धा के साथ मना रही है. ग्राम देवता, जाहेरथान, माझी थान, काली मंदिर और मालंचा थान में ग्रामीण सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ पूजा-अर्चना की गयी. अनुष्ठान का मुख्य संचालन गांव के नायकी बाबा राजेंद्र हेंब्रम और कुडाम नायकी की ओर से पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया. राजेंद्र हेंब्रम ने कहा कि माअ मोड़े पूजा के माध्यम से गांव को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने और खुशहाली लाने की प्रार्थना की जाती है. धार्मिक अनुष्ठान के बाद गांव के मेला डंगाल स्थित जाहेरथान में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जहां आदिवासी महिलाओं ने मांदर की थाप पर पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया. मौके पर माझी बाबा मनोहरी हेंब्रम, गोडेत सुशील हांसदा, जोगमाझी आमीन हेंब्रम, लासेरसाल शत्रुघ्न हांसदा, सर्केल हेंब्रम, महादेव हेंब्रम, जनेश्वर हेंब्रम आदि थे.
पुतुलजोड़ गांव में धूमधाम से की गयी माअ मोड़े पूजा
बिंदापाथर. पुतुलजोड़ गांव में मंगलवार को आदिवासी समाज के अटूट आस्था का प्रतीक 'माअ मोड़े पूजा' बड़े ही धूमधाम से संपन्न हुई.
