प्रतिनिधि, जामताड़ा. शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीइटी) की अनिवार्यता को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ राज्यभर के शिक्षकों में आक्रोश है. इस मुद्दे पर अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ, जामताड़ा की बैठक मध्य विद्यालय गायछांद में हुई. सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि संघ इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ मजबूती से संघर्ष करेगा. बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष महेश्वर घोष ने की. उन्होंने कहा कि सभी शिक्षक प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत पत्र लिखकर विरोध दर्ज करा रहे हैं. यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा. जिला महासचिव हरि प्रसाद राम ने कहा कि सोशल मीडिया सहित विभिन्न मंचों पर इस मुद्दे को मुखरता से उठाया जायेगा. प्रमंडलीय राज्य उपाध्यक्ष वाल्मीकि कुमार ने स्पष्ट किया कि कोई भी नया नियम पूर्व नियुक्तियों पर लागू नहीं किया जा सकता. टीइटी की बाध्यता शिक्षकों के अधिकारों का हनन है. जिला संगठन मंत्री द्वारिका राम ने कहा कि शिक्षा विभाग में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है. यह निर्णय विद्यालयों के बंद होने और गरीब बच्चों की शिक्षा बाधित होने की दिशा में धकेल देगा. प्रवक्ता दिनेश करमाली ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ झारखंड सरकार द्वारा रिव्यू पीटिशन दाखिल न करने का निर्णय शिक्षकों की सेवा और प्रोन्नति के लिए चिंताजनक है. संघ के जामताड़ा इकाई ने झारखंड सरकार से मांग की कि वह इस विषय पर पुनर्विचार याचिका दायर करे अथवा अध्यादेश लाकर शिक्षकों की सेवा एवं भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करे. बैठक में जिला उपाध्यक्ष राकेश कांत रौशन और विजय कुमार, संयुक्त सचिव अमरनाथ दास और संजय कुमार, राजेश कुमार सिन्हा, रंजीत कुमार, विद्या सागर, अक्षय कुमार, खुर्शीद अनवर, शिवपूजन शर्मा, संजय कुमार सिन्हा, रंजन कुमार, नंदलाल सोरेन, पंकज कुमार, परिमल मरांडी, मनोज कुमार राम, मुकेश कुमार शर्मा, प्रीति कुमार रविकर, विकास कुमार, उदय नारायण प्रसाद, नवीन कुमार, सत्येंद्र कुमार सिन्हा शामिल थे.
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