बिंदापाथर. मंझलाडीह गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा जारी है. इसके द्वितीय दिन वृंदावन धाम के कथावाचक कुलदीप कृष्णा जी महाराज ने राजा परीक्षित प्रसंग का वर्णन किया. कहा कि श्रीमद्भागवत मनुष्य को कर्मयोग की राह पर चलने की प्रेरणा देती है. उन्होंने बताया कि वन में आखेट के दौरान प्यास से व्याकुल राजा परीक्षित ऋषि शमीक के आश्रम पहुंचे, जहां ध्यानमग्न ऋषि द्वारा कोई उत्तर न मिलने पर उन्होंने क्रोधवश मृत सर्प को उनके गले में डाल दिया. इस घटना से क्रोधित होकर ऋषि के पुत्र ऋंगी ने राजा को सातवें दिन तक्षक सर्प के डंसने का श्राप दे दिया. बाद में शमीक ऋषि ने इसे अनुचित बताते हुए अपने पुत्र को फटकार लगाई और कहा कि राजा परीक्षित एक धर्मनिष्ठ शासक है. वहीं श्राप की जानकारी मिलने पर राजा परीक्षित ने इसे दंड नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का अवसर माना और शेष जीवन भगवत भक्ति व ज्ञान अर्जन में लगाने का संकल्प लिया.
श्रीमद्भागवत मनुष्य को कर्मयोगी बनाती है : कथावाचक
बिंदापाथर. मंझलाडीह गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा जारी है.
