मां कालरात्रि की धूमधाम से हुई पूजा, महाअष्टमी आज

मुरलीपहाड़ी. शारदीय नवरात्र के नौ दिनों में हर दिन देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. सातवें दिन का विशेष महत्व होता है,

मुरलीपहाड़ी. शारदीय नवरात्र के नौ दिनों में हर दिन देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. सातवें दिन का विशेष महत्व होता है, जिसे महासप्तमी कहा जाता है. यह दिन मां दुर्गा के सबसे उग्र स्वरूप मां कालरात्रि को समर्पित है. काल का अर्थ है समय या मृत्यु और रात्रि का अर्थ है रात. मां कालरात्रि सभी अंधकार और अज्ञान का नाश करने वाली है. आचार्य बंधन मुखर्जी ने कहा कि पौराणिक कथाओं के अनुसार जब शुंभ और निशुंभ नाम के राक्षसों ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया, तब देवताओं ने उनसे रक्षा के लिए मां दुर्गा की पूजा की. इस युद्ध में रक्तबीज नाम के एक राक्षस ने अपनी शक्ति से सभी को डरा दिया था. रक्तबीज को यह वरदान प्राप्त था कि उसके रक्त की एक भी बूंद धरती पर गिरने से उसी के समान एक और शक्तिशाली राक्षस उत्पन्न हो जायेगा, जब मां दुर्गा ने रक्तबीज को मारना शुरू किया, तो उसके रक्त की बूंदों से लाखों राक्षस पैदा हो गए, जिससे युद्ध की स्थिति और खराब हो गयी, तब, मां दुर्गा ने अपनी शक्ति से मां कालरात्रि को उत्पन्न किया. मां कालरात्रि का रूप बहुत उग्र है. उनके शरीर का रंग काला, बिखरे हुए बाल और तीन विशाल नेत्र हैं. उन्होंने रक्तबीज पर प्रहार किया और उसके रक्त की एक भी बूंद को धरती पर गिरने से पहले ही अपनी मुख के अंदर ले ली. इस तरह मां कालरात्रि ने रक्तबीज का संहार किया और तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त कराया. कहा जाता है कि मां कालरात्रि की पूजा से गुप्त शत्रुओं का नाश होता है. साथ ही सभी दुख दूर होते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By JIYARAM MURMU

JIYARAM MURMU is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >