प्रतिनिधि, जामताड़ा : पत्नी को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के मामले में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राधा कृष्ण के न्यायालय ने शुक्रवार को आरोपी पति सुबोध रवानी को बीएनएस की धारा 108 के तहत छह साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी. अर्थदंड नहीं देने पर डेढ़ माह की अतिरिक्त सजा भुगतने का आदेश दिया गया है.
तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी किया
पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर न्यायालय ने आरोपी सास गुड़िया देवी, ससुर दिलीप रवानी और देवर छोटू रवानी को बरी कर दिया. मामले को लेकर करमाटांड़ थाना कांड संख्या 14/2026 दर्ज किया गया था. मृतका प्रीति देवी की मां अनीता देवी के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गयी थी.
चार दिन बाद कुएं से मिला था शव
प्राथमिकी के अनुसार, प्रीति का विवाह हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार सुबोध रवानी के साथ हुआ था. विवाह के बाद दोनों का वैवाहिक जीवन सामान्य रूप से चल रहा था और इस दौरान प्रीति देवी दो बच्चों की मां बनी.
प्राथमिकी के अनुसार, 5 मार्च 2026 को प्रीति के पति सुबोध रवानी ने फोन कर उसकी मां अनीता देवी को बताया कि प्रीति बिना बताए घर से कहीं चली गयी है. सूचना मिलने के बाद परिजन उसके ससुराल पहुंचे और आसपास के क्षेत्रों में काफी खोजबीन की, लेकिन प्रीति का कोई पता नहीं चला.
करीब चार दिन बाद ग्रामीणों ने परिजनों को सूचना दी कि एक महिला का शव कुएं में पड़ा हुआ है. सूचना मिलने पर परिजन तेलियाडीह स्थित ससुराल पहुंचे. कुएं से बरामद शव की पहचान प्रीति देवी के रूप में की गयी.
मां के बयान पर दर्ज हुआ था मामला
इसके बाद मृतका की मां ने पति समेत ससुरालवालों पर उसकी बेटी की हत्या करने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करायी थी.
आठ गवाहों की हुई गवाही
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल आठ गवाहों की गवाही न्यायालय में करायी गयी. गवाहों के बयान और न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी पति सुबोध रवानी को बीएनएस की धारा 108 में छह साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी.
