जमीन हमारी,बिजली बांग्लादेश को क्यों? जामताड़ा में DVC गेट जाम करने की बड़ी चेतावनी

जामताड़ा के विस्थापितों ने DVC के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जमीन हमारी, बिजली बांग्लादेश को जैसे नारों के साथ DVC गेट जाम करने की चेतावनी दी है. जानें उनकी मुख्य मांगें.

जामताड़ा.जामताड़ा के लाधना में डीवीसी (DVC) सोलर प्रोजेक्ट के खिलाफ विस्थापितों का गुस्सा फूट पड़ा है. सिद्धू-कान्हू फुटबॉल मैदान में आयोजित एक विशाल सभा में विस्थापितों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी लंबित मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे डीवीसी का मुख्य गेट जाम कर उग्र आंदोलन करेंगे. सभा में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे विस्थापित नेता रोबिन मिर्धा ने सीधे तौर पर प्रबंधन को ललकारा है.

79 वर्षों का दर्द: 'जमीन हमारी, बिजली बांग्लादेश को'

सभा को संबोधित करते हुए विस्थापित नेता रोबिन मिर्धा ने भावुक और आक्रामक तेवर अपनाए. उन्होंने कहा, "यह कैसा न्याय है? जमीन हमारी डूबी, पानी बंगाल ले जा रहा है और इससे बनने वाली बिजली बांग्लादेश को मिल रही है! जबकि जमीन के असली मालिक पिछले 79 वर्षों से अपने हक और अधिकार की भीख मांग रहे हैं." उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 1953 में मैथन डैम के निर्माण के समय जामताड़ा के हजारों लोगों को उजाड़ा गया था और आज तक उन्हें न्याय नहीं मिला.

विस्थापितों से आज भी वसूला जा रहा है डूबी जमीन का लगान

आंदोलनकारियों ने डीवीसी प्रबंधन और प्रशासन पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि जिस जमीन पर डीवीसी पानी रखकर करोड़ों रुपये कमा रहा है, उस डूबी हुई जमीन का लगान आज भी गरीब विस्थापितों से वसूला जा रहा है. नेताओं ने मांग की कि वर्ष 1978 के पैनल से जिन विस्थापितों के नाम दुर्भावनापूर्ण तरीके से हटाए गए थे, उनकी नई सूची बनाकर तुरंत मुआवजा, नौकरी और पुनर्वास का लाभ दिया जाए.

'अब और नहीं सहेंगे': दोबारा उजाड़ने की साजिश

विस्थापित नेताओं ने कहा कि एक बार मैथन डैम के लिए उजाड़े जाने के बाद, अब सोलर प्रोजेक्ट के नाम पर विस्थापितों और स्थानीय मछुआरों को फिर से बेघर करने की तैयारी चल रही है. उन्होंने साफ किया कि जब तक प्रत्येक विस्थापित गांव में सीएसआर (CSR) फंड के तहत मुफ्त बिजली, शुद्ध पानी, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल जातीं, तब तक लाधना में सोलर प्रोजेक्ट की एक ईंट भी रखने नहीं दी जाएगी.

सभा में उमड़ा जनसैलाब, एकजुट हुए कई दिग्गज

इस विरोध सभा को स्थानीय नेता अकबर अंसारी ने भी संबोधित किया और विस्थापितों की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर चलने का संकल्प लिया. मौके पर मुख्य रूप से अशोक मरांडी, मुख्तार अंसारी, फुरकान अंसारी, प्रेम पंडित, गोपाल पंडित, सोलन मंडल, मिर्धा उमापाल, हेमंत मुर्मू, सुधीर मरांडी, पिंटू अंसारी, कौशल पंडित, जय सिंह हेमराम, बसर मंडल और अशोक मुर्मू सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे.

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By Umesh Kumar

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