मांझी परगना सरदार महासभा के कोर कमेटी की हुई बैठक प्रतिनिधि, जामताड़ा. मांझी परगना सरदार महासभा जिला जामताड़ा कोर कमेटी की बैठक प्रखंड सभागार में हुई. अध्यक्षता मांझी परगना सरदार महासभा के जिलाध्यक्ष सुनील कुमार हांसदा ने की. बैठक में सभी छह प्रखंडों से मांझी परगना सरदार महासभा के सक्रिय सदस्य व पदाधिकारी शामिल हुए. बैठक में आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा की गयी. सभी छह प्रखंडों में प्रखंडस्तर पर मांझी, जोगमांझी, पाराणिक, जोगपाराणिक, नाईकी, कुडाम नाईकी, भोद्दो, गोडेत, लासेरसाल के लिए सम्मान राशि, पेसा कानून लागू करने आदि मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया. 24 अक्तूबर को नारायणपुर में, 25 को करमाटांड़ में, 30 अक्तूबर को जामताड़ा में, 10 नवंबर को नाला में एवं 12 नवंबर को कुंडहित प्रखंड कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन किया जायेगा. तत्पश्चात 22 दिसंबर को उक्त मांगों को लेकर जामताड़ा समाहरणालय के समक्ष प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया. बैठक में जिला एवं प्रखंड स्तर पर मासिक बैठक की तिथि तय की गयी. जिला की मासिक बैठक माह के प्रत्येक 25 तारीख को की जायेगी. माह के प्रत्येक 10 तारीख को नारायणपुर में, 12 तारीख को करमाटांड़ में, 15 तारीख को नाला में, 17 तारीख को कुंडहित में, 24 तारीख को जामताड़ा में की जायेगी. फतेहपुर प्रखंड के लिए दूसरी बैठक में तय की जायेगी. राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सेवानिवृत्त शिक्षक सुनील कुमार बास्की ने कहा कि गांव के स्वशासन व्यवस्था के परम्परा एवं रूढ़ि के मुख्य व्यक्ति मांझी का पद साजिश के तहत मिटाने का प्रयास हो रहा है उसे हम सफल होने नहीं देंगे. यह भी कहा कि सरकार संताल सिविल रूल 1946 एवं संताल परगना जस्टिस रेगुलेशन 1893 दोनों कानून संताल विद्रोह 1855 के परिणाम स्वरूप संताल एवं पहाड़िया के लिए कानून बना है. आज उसे संशोधन करने का प्रयास चल रहा है. इसे हमें रोकना होगा. बीर मांझी हराधन मुर्मू ने कहा कि हमें अपने लोगों के हक के लिए जागरूक के साथ लड़ाई लड़नी है. समाज में ढेर सारे लोग मांझी परगना के नाम से संगठन चलाते हैं उन्हें भी पहचानने की जरूरत है. समाजसेवी लेबेन हांसदा ने कहा कि आज जरूरत है समाज को सही दिशा में ले जाने की, नहीं तो हमारे लोग दिग्भ्रमित हो जाएंगे. मौके पर महादेव हांसदा, मांझी सीताराम मुर्मू, मांझी दारोगा मुर्मू, तारकेश्वर मुर्मू, संजीत हेंब्रम, सुनील बास्की, मंगल सोरेन, हेमलाल मुर्मू, नेपाल हांसदा, शिवलाल मुर्मू आदि मौजूद थे.
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