संवाददाता, जामताड़ा
सदर अस्पताल में गर्भवती महिला की मौत के बाद हुई तोड़फोड़ के मामले में भाजपा जिला अध्यक्ष सुमित शरण समेत आठ कार्यकर्ताओं पर दर्ज प्राथमिकी के विरोध में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी ने जामताड़ा समाहरणालय का घेराव किया. प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, पूर्व मंत्री रणधीर सिंह, पूर्व सांसद सुनील सोरेन, पूर्व मंत्री सत्यानंद झा बाटुल, पूर्व विधायक सीता सोरेन सहित बड़ी संख्या में भाजपा नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए.
सभा को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि गर्भवती महिला की मौत के बाद हुई घटना में भाजपा जिला अध्यक्ष समेत अन्य कार्यकर्ताओं पर प्राथमिकी दर्ज करना प्रशासन की गलत कार्रवाई है.
'कानून से चले प्रशासन, दबाव में नहीं'
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि जामताड़ा के डीएसपी भाजपा जिला अध्यक्ष के घर छापेमारी करने पहुंचे, जबकि यदि किसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी थी तो उसका तरीका न्यायालय के माध्यम से होना चाहिए था. उन्होंने कहा कि प्रशासन को किसी मंत्री के दबाव में नहीं, बल्कि कानून के अनुसार काम करना चाहिए.
स्वास्थ्य मंत्री पर साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यदि वे अपने जिले के अस्पतालों की व्यवस्था नहीं सुधार सकते, तो पूरे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था कैसे संभालेंगे. उन्होंने 108 एंबुलेंस सेवा के संचालन में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार कमीशनखोरी के लिए बार-बार नई एंबुलेंस खरीद रही है, जबकि अस्पतालों की स्थिति अब भी बदहाल बनी हुई है.
'मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार को दे रहे संरक्षण'
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भी हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार में भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य में बिना रिश्वत आम लोगों के काम नहीं होते और खनिज संपदा की खुलेआम लूट हो रही है. उन्होंने बालू घाटों की नीलामी नहीं होने, अवैध खनन और रॉयल्टी व्यवस्था को लेकर भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए.
भाजपा ने दर्ज प्राथमिकी वापस लेने की मांग की
प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेताओं ने जिला अध्यक्ष सुमित शरण समेत अन्य कार्यकर्ताओं पर दर्ज प्राथमिकी को वापस लेने की मांग की. साथ ही राज्य सरकार से स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार, कानून-व्यवस्था मजबूत करने और भ्रष्टाचार पर प्रभावी कार्रवाई करने की मांग उठाई. समाहरणालय घेराव के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर समाहरणालय परिसर के आसपास अतिरिक्त बल की तैनाती की थी.
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