नहाय-खाय के साथ ही नारायणपुर में छठ पर्व शुरू

नारायणपुर. चार दिवसीय छठ पूजा का शुभारंभ शनिवार को नहाय-खाय के साथ हो गया.

By JIYARAM MURMU | October 25, 2025 7:44 PM

नारायणपुर. चार दिवसीय छठ पूजा का शुभारंभ शनिवार को नहाय-खाय के साथ हो गया. छठ पूजा को लेकर नारायणपुर सहित मंडरो, कमलडीह, बरमसिया, आशाडीह, करमाटांड़ में सुबह से ही भक्तिमय वातावरण देखने को मिला. महिलाओं ने स्नान कर पवित्रता के साथ भगवान भास्कर की उपासना आरंभ की. नियमपूर्वक छठ व्रत की शुरुआत की. महिलाओं ने कद्दू-भात, चना दाल और कचालू का भोग लगाकर प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया. नारायणपुर बाजार में सुबह से ही कद्दू की खरीदारी को लेकर लोगों की भीड़ उमड़ी रही. बाजार में कद्दू की भारी बिक्री हुई. सब्जियों के दामों में भी बढ़ोतरी देखी गयी. रविवार को खरना होगा, जिसमें व्रती गुड़-चावल की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करेंगे. सोमवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पण किया जाएगा, जबकि मंगलवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण होगा. …………………………………………………………….. नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय छठ महापर्व शुरू फोटो- 06 प्रसाद ग्रहण करती छठ व्रती प्रतिनिधि, बिंदापाथर – नहाय खाय के साथ लोक आस्था का चार दिवसीय छठ महापर्व शुरू हो गया. छठ पूजा को लेकर बिंदापाथर थाना क्षेत्र के प्रजापेटिया, श्रीपुर, मोहनपुर, माड़ालो, गेड़िया, शिमला आदि स्थानों में भक्ति और उल्लास का माहौल बना हुआ है. वहीं छठ व्रतियों को पूजा अर्चना में किसी प्रकार की दिक्कत ना हो इसके लिए छठ घाटों की साफ-सफाई लगभग पूरी कर ली गई है. छठ घाटों में आकर्षक ढंग से सजाया गया है. थाना क्षेत्र के विभिन्न चौक चौराहों पर फल एवं पूजन सामग्री की दुकानें सज चुकी है जहां श्रद्धालुओं द्वारा खरीदारी किया जा रहा है. इस चार दिवसीय छठ पूजा अनुष्ठान में प्रथम दिन नहाय-खाय का आयोजन किया गया. छठ व्रतियों के घर श्रद्धालुओं ने कद्दू भात का प्रसाद ग्रहण किया. दूसरे दिन खरना और तीसरे दिन अस्ताचल सूर्य की पूजा और चौथे दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने साथ ही पर्व संपन्न हो जाएगा. सूर्योपासना के इस पवित्र चार दिवसीय महापर्व के प्रथम दिन शनिवार को छठव्रती श्रद्धालु नदियों-तालाबों के निर्मल एवं स्वच्छ जल में स्नान करने के बाद कद्दू भात ग्रहण कर व्रत को शुरू किया. नहाय खाय में कद्दू प्रसाद का काफी महत्व है. महापर्व के दूसरे दिन श्रद्धालु दिन भर बिना जलग्रहण किए उपवास रखने के बाद सूर्यास्त होने पर पूजा करते हैं और उसके बाद एक बार ही दूध और गुड़ से बना खीर प्रसाद ग्रहण करते हैं. इसके बाद से उनका करीब 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है. लोक आस्था के इस महापर्व के तीसरे दिन व्रतधारी अस्ताचल सूर्य को नदी और तालाब में खड़े होकर प्रथम अर्घ्य अर्पित करेंगे. महापर्व के चौथे और अंतिम दिन फिर से नदियों और तालाबों में व्रतधारी उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देंगे. भगवान भास्कर को दूसरा अर्घ्य अर्पित करने के बाद श्रद्धालुओं का 36 घंटे का निर्जला व्रत संपन्न होगा. छठ पूजा उत्सव को लेकर बिंदापाथर थाना क्षेत्र में भक्ति और उल्लास का माहौल बना हुआ है.

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