धरोहर बचानी है तो मतभेद छोड़ एकजुट हों आदिवासी, मरांगबुरु की रक्षा के लिए फागू बेसरा ने दिया संदेश

आदिवासियों के धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए ओडिशा में संकल्प सभा हुई. अध्यक्ष फागू बेसरा ने मरांगबुरु और अन्य धरोहरों के संरक्षण हेतु एकजुट होने का आह्वान किया.

जमशेदपुर: मरांगबुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा की ओर से ओडिशा के रायरंगपुर में राज्यस्तरीय संकल्प सभा का आयोजन किया गया. इसमें आदिवासियों के धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की सुरक्षा तथा ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया. सभा में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए मोर्चा के अध्यक्ष फागू बेसरा ने कहा कि मरांगबुरु समेत अन्य सभी पारंपरिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों की रक्षा के लिए पूरे संताल समाज को एकजुट होना होगा.

आदिवासी समाज की स्वशासन व्यवस्था के प्रमुखों को आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभानी होगी. उन्होंने कहा कि गांव-गांव जाकर लोगों को मरांगबुरु और अपनी धरोहरों की ऐतिहासिक महत्ता से जागरूक करना होगा. सभी को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सामाजिक मुद्दों पर अपनी एकता व अखंडता का परिचय देना होगा.

4-5 नवंबर को जुटेंगे देश भर से आदिवासी समाज

फागू बेसरा ने आगे बताया कि आगामी 4 और 5 नवंबर को गिरिडीह जिले के मधुबन में 'मरांगबुरु धोरोमगाढ़ महासम्मेलन' का आयोजन किया जाएगा. इस महासम्मेलन के माध्यम से मरांगबुरु पारसनाथ के संरक्षण के लिए वृहद आंदोलन का बिगुल फूंका जाएगा. उन्होंने ओडिशा, झारखंड, बिहार और बंगाल समेत पूरे देश के आदिवासियों से इस महासम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की.

अस्तित्व बचाने के लिए पूर्वजों की सीख पर चलने का आह्वान

मोर्चा के महासचिव हीरालाल माझी ने कहा कि वर्तमान समय में आदिवासियों पर चौतरफा संकट है. लोग अपनी ही जमीनों से विस्थापित होकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं. यदि यही स्थिति रही, तो आने वाले समय में समाज का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा. उन्होंने कहा कि समय रहते पूर्वजों की जीवनी से सीख लेकर समाज के अस्तित्व की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे.

एकजुट होकर करें आवाज बुलंद करने का लिया गया संकल्प

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने सामाजिक धरोहरों को बचाने के लिए एकजुट होकर आवाज बुलंद करने का संकल्प लिया. मौके पर नारायण मुर्मू, चंद्रमोहन मुर्मू, अंता आलोक बास्के, सोमाय टुडू, सुरेंद्र टुडू, माझी बाबा बिंदे सोरेन, माझी बाबा दुर्गाचरण मुर्मू, माझी बाबा जगदीश बास्के, माझी लक्ष्मण माझी, टीएसी सदस्य जोसाई मार्डी, बहलदा के पूर्व विधायक प्रह्लाद पूर्ति, रायरंगपुर के पूर्व विधायक साहिबा सुशील हांसदा सहित कई बुद्धिजीवी, माझी परगना बाबा और बड़ी संख्या में युवा समाजसेवी उपस्थित थे.

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लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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