जमशेदपुर: देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व को लेकर एक बार फिर बड़ा कॉरपोरेट विवाद खड़ा हो गया है. टाटा संस के चेयरमैन पद पर एन. चंद्रशेखरन को दोबारा सेवा विस्तार देने के कदम को समूह के मुख्य नियंत्रक व बहुलांश हिस्सेदार 'टाटा ट्रस्ट्स' ने सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह 'अवैध और अमान्य'करार दिया है. गुरुवार को आयोजित टाटा संस बोर्ड की बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन. टाटा ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसके खिलाफ मतदान किया.
12 अगस्त को खुद ही पद नहीं लेने का दिया था पत्र
टाटा ट्रस्ट्स की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि 12 अगस्त 2026 को एन. चंद्रशेखरन ने खुद टाटा संस बोर्ड को औपचारिक रूप से अवगत कराया था कि 20 फरवरी 2027 को कार्यकाल समाप्त होने के बाद वे इस पद की दौड़ में शामिल नहीं रहेंगे. शेयरधारकों से पूर्व विमर्श के बिना लिया गया यह फैसला सार्वजनिक हो चुका था, जिसे ट्रस्ट ने 13 अगस्त को ही स्वीकार कर लिया था. ट्रस्ट का कहना है कि समूह के लाखों कर्मचारियों, वित्तीय संस्थानों, बाजार और बहुलांश शेयरधारकों द्वारा इस निर्णय पर आगे बढ़ जाने के बाद अब इसे पलटा नहीं जा सकता.
बोर्ड में 4-1 का गणित, पर ट्रस्ट के नियमों से फंसा पेंच
गुरुवार को बोर्ड बैठक में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के पक्ष में चार निदेशकों ने समर्थन किया, जबकि नोएल टाटा ने विरोध दर्ज कराया. बहुमत के बावजूद टाटा ट्रस्ट्स ने कंपनी के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' के विशेष प्रावधानों का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को शून्य बताया है.
Also read: इंजीनियरिंग के बाद टाटा स्टील में लगी पहली नौकरी, फिर ऐसे बदली अरविंद केजरीवाल की जिंदगी
ट्रस्ट के मुख्य विधिक तर्क
नामित निदेशकों की सहमति जरूरी: नियमों के अनुसार चेयरमैन की नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति तभी वैध मानी जा सकती है जब ट्रस्ट द्वारा नामित दोनों निदेशक बैठक में उपस्थित हों और दोनों ही प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करें. विरोध से स्वतः निरस्त: ट्रस्ट के नामित निदेशक के तौर पर नोएल टाटा द्वारा विरोध में मतदान किए जाने के कारण यह प्रस्ताव विधिक रूप से स्वतः प्रभावहीन और शून्य हो गया है.
पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ की कानूनी राय पेश
नोएल टाटा ने अपने रुख की पुष्टि के लिए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ से प्राप्त कानूनी राय भी बोर्ड पटल पर रखी. हालांकि, बोर्ड ने इस राय को संज्ञान में नहीं लिया.
चयन समिति से नया उत्तराधिकारी चुनने पर अड़ा ट्रस्ट
टाटा ट्रस्ट्स ने स्पष्ट कर दिया है कि समूह के दीर्घकालिक हितों, स्थिरता और साख की रक्षा के लिए नियमों के तहत तत्काल एक ‘सलेक्शन कमेटी’ (चयन समिति) बनाई जानी चाहिए, ताकि तय समय सीमा के भीतर टाटा संस के नए चेयरमैन का चयन पारदर्शी तरीके से पूरा किया जा सके.
