टाटा स्टील जू में खत्म होगी बेजुबानों की तन्हाई, अब हिप्पो और उल्लू को भी मिलेगा जीवनसाथी

Tata Steel Zoological Park: जमशेदपुर के टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में अब जानवरों का अकेलापन दूर होगा. CZA के नये निर्देशों के बाद, पार्क प्रशासन अकेले रह रहे हिप्पो और उल्लू के लिए साथी तलाश रहा है. जानें कैसे यह पहल जानवरों के मानसिक तनाव को कम कर उनकी जान बचाएगी.

Tata Steel Zoological Park, जमशेदपुर : चिडियाघरों में रह रहे वन्यजीवों का अकेलापन अब उनके जीवन के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है. इसी समस्या को देखते हुए, सेंट्रल जू अथॉरिटी (केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण) ने देशभर के चिड़ियाघरों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किये हैं. निर्देश में कहा गया है कि जानवरों को अकेले रखने के बजाय उनहें जोड़े (नर-मादा) या समूह में रखा जाए, ताकि उनके मानसिक और शारीरिक तनाव को कम किया जा सके. इसी कड़ी में टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क को भी अकेले रहने वाले जानवरों को जोड़े में रखने का निर्देश दिया गया है. जानकारी के अनुसार, फिलहाल टाटा स्टील नॉजिकल पार्क में हिपोपोटामस और उल्लू को छोड़कर अधिकतर जानवर जोड़े या समूह में हैं, पार्क प्रबंधन द्वारा सर्वेक्षण किया जा रहा है कि कहीं कोई अन्य जानवर अकेले तो नहीं रह रहा है. यदि ऐसा पाया जाता है, तो दूसरे चिड़ियाघरों से एक्सचेंज प्रक्रिया के जरिए उनके लिए जोड़ा उपलब्ध कराने की पहल की जायेगी.

चिड़ियाघर के उपनिदेशक क्या बोले

चिड़ियाघर के उपनिदेशक डॉ. नईम अख्तर ने बताया कि फिलहाल बहुत कम जानवर अकेले हैं और लगभग सभी जानवर जोड़े या समूह में रह रहे हैं. बचे हुए जानवरों के लिए भी पार्टनर खोजने की प्रक्रिया जारी है, ताकि उनके व्यवहार और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़े. दरअसल, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की रिपोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर रूप से सामने लाया है. रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 के बीच देश के चिड़ियाघरों में 127 वन्यजीवों की मौत हुई. इनमें चिंकारा, काला हिरण, बारहसिंगा, नीलगाय, भारतीय हॉग हिरण और चीतल जैसी प्रजातियां शामिल हैं.

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35 जानवरों की मौत सदमे की वजह से हुई

रिपोर्ट में बताया गया कि 35 जानवरों की मौत सदमे और 25 जानवरों की मौत शारीरिक वा मानसिक तनाव के कारण हुई. इससे पहले 2023-24 में 148 जानवरों की मौत हुई थी, जिनमें 37 की मौत सदमे और 32 की मौत तनाव के कारण हुई थी. वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जंगल से अलग होकर कैद में रहने के कारण जानवर मानसिक दबाव झेलते हैं, खासकर काला हिरण और अन्य शाकाहारी प्रजातियां अत्यधिक संवेदनशील होती है. तेज आवाज, अचानक हलचल, कैप्चर मायोपैथी, आपसी संघर्ष और पर्यावरणीय बदलाव उनकी मौत का कारण बन सकते हैं. इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अब चिड़ियाधरों में जानवरों का अकेलापन खत्म करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

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By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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