जमशेदपुर: देश के सबसे बड़े और प्रॉफिटेबल कारोबारी समूहों में शामिल टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में बुधवार को अचानक तेज गिरावट देखने को मिली. सुबह से ही टाटा की कई बड़ी कंपनियां दबाव में रहीं और दोपहर तक गिरावट करीब 4 फीसदी तक पहुंच गई. सबसे बड़ी गिरावट TCS में देखने को मिली, जबकि Tata Motors, Tata Steel और Titan जैसे बड़े नाम भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे. बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर को माना जा रहा है.
टाटा के शेयरों में कितनी गिरावट?
आज के कारोबार के दौरान टाटा ग्रुप की कई कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली. Reuters के मुताबिक TCS करीब 4.2 फीसदी तक गिरा, जबकि Tata Motors में करीब 2.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. Tata Steel और Titan भी करीब 2 फीसदी तक नीचे आए.
- TCS: करीब 4.2 फीसदी की गिरावट.
- Tata Motors Passenger Vehicles: करीब 2.5 फीसदी नीचे.
- Tata Steel: करीब 2 फीसदी तक गिरावट.
- Titan: करीब 2 फीसदी तक नीचे.
- Tata Consumer Products: करीब 1.5 फीसदी की कमजोरी.
- Tata Power: गिरावट के साथ कारोबार.
- Tata Technologies: दबाव में.
- Indian Hotels Company: शेयर में कमजोरी.
- Voltas: गिरावट के साथ कारोबार.
यानी टाटा ग्रुप की कई कंपनियों में एक साथ गिरावट देखने को मिली, लेकिन सबसे ज्यादा दबाव TCS पर रहा.
आखिर अचानक क्यों गिरे टाटा के शेयर?
इसके पीछे सबसे बड़ी वजह टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का इस्तीफा है. चंद्रशेखरन ने पद छोड़ने का फैसला किया है, हालांकि वह अपना मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक पूरा करेंगे. इसका मतलब यह है कि तत्काल टाटा ग्रुप के रोजमर्रा के कारोबार में कोई अचानक बदलाव नहीं होने जा रहा, लेकिन निवेशकों के लिए असली सवाल अब आगे के नेतृत्व को लेकर है.
चंद्रशेखरन के दोबारा नियुक्ति को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के साथ लंबे समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही थीं. Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक विवाद में बोर्ड में प्रतिनिधित्व, ग्रुप की रणनीति, Air India से जुड़े नुकसान और Tata Sons की भविष्य की दिशा जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं. Tata Trusts के पास Tata Sons की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है.
सिर्फ इस्तीफा नहीं, यह भी है कारण
टाटा ग्रुप इस समय कई बड़े कारोबारी मोर्चों पर काम कर रहा है. Air India के विस्तार, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार में निवेश और दूसरे नए बिजनेस के बीच ग्रुप को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है. TCS पर AI के बढ़ते असर और प्राइसिंग प्रेशर की चिंता है, जबकि जगुआर लैंड रोवर पर हुए साइबर अटैक और Air India से जुड़े रेगुलेटरी इशू ने भी ग्रुप के सामने मुश्किलें बढ़ाई हैं.
ऐसे माहौल में चेयरमैन पद पर आने वाला बदलाव निवेशकों के लिए सामान्य खबर नहीं है. बाजार भविष्य की रणनीति, नए नेतृत्व और बड़े फैसलों की दिशा को लेकर सतर्क हो गया है. यही वजह है कि एक ही दिन में टाटा ग्रुप की कई कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला.
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि टाटा की कंपनियों के कारोबार में अचानक कोई बड़ी खराबी आ गई है. फिलहाल शेयर बाजार की प्रतिक्रिया मुख्य रूप से नेतृत्व परिवर्तन और उससे जुड़ी अनिश्चितता को लेकर है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि फरवरी 2027 के बाद टाटा संस की कमान किसके हाथ में जाती है और नया नेतृत्व ग्रुप की मौजूदा रणनीति को किस दिशा में आगे बढ़ाता है.
