रघुवर दास ने पेसा नियमावली और सरना धर्म कोड पर हेमंत सोरेन को क्या लिखा?

Raghubar Das to Hemant Soren: रघुवर दास ने लिखा है कि जुलाई 2023 में आपकी सरकार ने इस दिशा में पहल करते हुए पेसा नियमावली का प्रारूप प्रकाशित कर आम जन से आपत्ति, सुझाव एवं मंतव्य आमंत्रित किये. अक्टूबर 2023 में ट्राइबल एडवाजरी कमेटी (टीएसी) की बैठक हुई, जिसमें प्राप्त नियमसंगत सुझाव एवं आपत्तियों को स्वीकार करते हुए नियमावली प्रारूप में संशोधन किया गया.

Raghubar Das To Hemant Soren| जमशेदपुर, संजीव भारद्वाज : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और ओडिशा के पूर्व राज्यपाल रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने मांग की है कि पेसा नियमावली को जल्द से जल्द अधिसूचित कर लागू किया जाये. रघुवर दास ने सरना धर्म कोड पर भी कुछ बातें हेमंत सोरेन लिखी चिट्ठी में कहीं हैं.

‘देश के 10 अनुसूचित क्षेत्रों वाले राज्यों में झारखंड भी’

बुधवार 18 जून 2025 को जारी पत्र में रघुवर दास ने लिखा है कि वर्ष 1996 में अनुसूचित क्षेत्रों में स्वशासन की अवधारणा को साकार करने के लिए पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम अर्थात् पेसा कानून, संसद से पारित हुआ था. देश के 10 अनुसूचित क्षेत्रों वाले राज्यों की सूची में झारखंड भी शामिल है, लेकिन आज तक यहां पेसा कानून लागू नहीं हो पाया है.

2018 में पेसा नियमावली के प्रारूप पर शुरू हुआ था काम – रघुवर दास

रघुवर दास ने लिखा है कि झारखंड में वर्ष 2014-19 तक भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार थी. वर्ष 2018 में उन्होंने (रघुवर दास ने) मुख्यमंत्री के रूप में पेसा नियमावली के प्रारूप के निर्माण की दिशा में कदम उठाया था. इस संदर्भ में 14 विभागों से मंतव्य मांगे गये थे. प्रारूप पर व्यापक विचार-विमर्श की प्रक्रिया चल रही थी. इसी दौरान चुनाव हुए और वर्ष 2019 में विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में आपके (हेमंत सोरेन के) नेतृत्व में सरकार का गठन हुआ.

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महाधिवक्ता ने भी पेसा नियमावली को दे दी है हरी झंडी

पूर्व सीएम ने लिखा है कि जुलाई 2023 में आपकी सरकार ने इस दिशा में पहल करते हुए पेसा नियमावली का प्रारूप प्रकाशित कर आम जन से आपत्ति, सुझाव एवं मंतव्य आमंत्रित किये. अक्टूबर 2023 में ट्राइबल एडवाजरी कमेटी (टीएसी) की बैठक हुई, जिसमें प्राप्त नियमसंगत सुझाव एवं आपत्तियों को स्वीकार करते हुए नियमावली प्रारूप में संशोधन किया गया. मार्च 2024 में विधि विभाग एवं महाधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि नियमावली का प्रारूप सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट के न्यायिक निर्देशों के अनुरूप है.

प्रकृति पूजक है सरना समाज – रघुवर दास

रघुवर दास ने लिखा है कि 5वीं अनुसूची के अंतर्गत पेसा कानून जनजातीय समाज की अस्मिता एवं स्वशासन की आत्मा है. सरना (जनजातीय) समाज प्रकृति पूजक है और उसकी आस्था जंगल, जमीन, नदी और पहाड़ में है. पूर्वों ने सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश को संरक्षित किया है, सरना (जनजातीय) समाज ने आज भी उसे उसी रूप में संजोकर रखा है. पेसा कानून लागू होने से सरना (जनजातीय) समाज अपने क्षेत्र की परंपरा, रीति रिवाज, उपासना पद्धति और धार्मिक विश्वासों का संरक्षण, संवर्धन और दस्तावेजीकरण कर सकता है.

‘ग्रामसभा के दस्तावेज को मान्यता दे सकती है राज्य सरकार’

उन्होंने लिखा कि ग्रामसभा के द्वारा तैयार दस्तावेज को राज्य सरकार मान्यता दे सकती है. उसे कानूनी दस्तावेज के रूप में भी मान्यता दी जा सकती है. भारतीय कानून यह स्वीकार करता है कि परंपरा, रिवाज और उपासना पद्धति सिर्फ सांस्कृतिक विरासत ही नहीं, बल्कि कानूनी अधिकार है. यह कानूनी अधिकार सरना समाज को स्थानीय स्वीकृति से लेकर राज्य स्तरीय मान्यता प्रदान कर सकती है. राज्य में कई जनजातीय समूह निवास करते हैं, जिसकी परंपरा और विरासत काफी प्राचीन है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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