टेंपो में 8-10, वैन में 12-15 बच्चे, शहर की सड़कों पर दौड़ रहे ओवरलोड स्कूल वाहन..पढ़ें पूरी खबर

जमशेदपुर की सड़कों पर स्कूली वाहन बच्चों की जान को खतरे में डाल रहे हैं. छोटे वाहनों में क्षमता से दोगुने बच्चे बिठाए जा रहे हैं. ऐसी ओवरलोडिंग और पुराने वाहनों के कारण शहर में कई हादसे हो चुके हैं, फिर भी कार्रवाई नदारद है.

जमशेदपुर: शहर की सड़कों पर हर सुबह और दोपहर बच्चों की जान को जोखिम में डालकर स्कूली वाहन दौड़ते नजर आते हैं. पांच से छह बच्चों की क्षमता वाले वाहनों में 12 से 15 बच्चों को ठूंसकर ले जाया जा रहा है. टेंपो में आठ से 10 और वैन में 12 से 15 बच्चे बैठाये जा रहे हैं. बच्चों के भारी स्कूल बैग कभी वाहन की छत पर रखे जाते हैं, तो कभी बाहर लटका दिये जाते हैं.

शहर में कई बार स्कूली वाहनों के हादसे हो चुके हैं, इसके बावजूद ओवरलोडिंग और पुराने-जर्जर वाहनों पर पूरी तरह रोक नहीं लग पायी है. सबसे चिंताजनक स्थिति स्कूल खुलने और छुट्टी होने के समय दिखाई देती है. प्रमुख स्कूलों के बाहर सुबह करीब 7:30 बजे और दोपहर 2 बजे ऐसे वाहनों में क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाने का सिलसिला देखा जाता है.

बच्चे खिड़कियों से बाहर निकलते हैं हाथ और सिर

एक सामान्य ऑटो में चालक के अलावा चार लोगों के बैठने की जगह होती है, लेकिन कई ऑटो में आठ से 10 बच्चों को बैठाया जा रहा है. चालक की सीट के दोनों ओर भी बच्चों को बैठाया जाता है. वहीं मारुति वैन और टाटा मैजिक में सीटों में बदलाव कर बीच में लकड़ी का पटरा लगा दिया जाता है, ताकि ज्यादा बच्चों को बैठाया जा सके.

वैन की पिछली सीट पर पांच, बीच में पांच और चालक के बगल में तीन से चार बच्चे बैठाये जाते हैं. कई बार बच्चे खिड़की से हाथ या सिर बाहर निकालते नजर आते हैं. ऐसे में सामने से आने वाले वाहन से टक्कर का खतरा बना रहता है.

हादसा होने पर ही जागता है प्रशासन

जब कोई बड़ा हादसा होता है, तो परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस की ओर से चेकिंग अभियान चलाया जाता है. कुछ वाहनों का चालान काटा जाता है और कुछ को जब्त भी किया जाता है. लेकिन कुछ दिनों बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है.

अभिभावकों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई स्थायी नहीं हो पा रही है. कई अभिभावक मजबूरी में भी ओवरलोड वाहन का इस्तेमाल करते हैं. उनका कहना है कि एक वाहन चालक बच्चों की संख्या कम करने पर वाहन लाने से मना कर देता है. ऐसे में पैसे बचाने या दूसरी सुविधा नहीं मिलने के कारण वे जोखिम उठाने को मजबूर होते हैं.

हाल के दिनों में हुए तीन बड़े हादसे

9 सितंबर: बर्मामाइंस थाना क्षेत्र के स्टेशन रोड में स्कूली वैन दीवार से टकरा गयी थी. वैन में 20 बच्चे सवार थे. हादसे में वाहन का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था.

7 अगस्त: गोविंदपुर थाना क्षेत्र के अन्ना चौक के पास एसडी पब्लिक स्कूल की बस की टक्कर से सात वर्षीय रुही कुमारी की मौत हो गयी थी. घटना के बाद लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया था.

27 जून: बिष्टुपुर थाना क्षेत्र में हिंदू पीठ के पास बच्चों से भरी स्कूली वैन पलट गयी थी. हादसे के बाद वैन में आग लग गयी थी. मौके पर मौजूद लोगों ने वाहन में फंसे बच्चों को बाहर निकालकर उनकी जान बचायी थी.

नियमों के पालन पर भी सवाल

स्कूली बच्चों के सुरक्षित परिवहन को लेकर सुप्रीम कोर्ट और केंद्रीय परिवहन मंत्रालय की ओर से दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं. इनमें स्कूली वाहनों की पहचान, सुरक्षा उपकरण और चालक से जुड़े नियम शामिल हैं. लेकिन शहर में चल रहे कई निजी टेंपो और वैन इन मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं.

स्कूली वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स, फायर एक्सटिंग्विशर और स्पीड गवर्नर जैसे सुरक्षा इंतजाम होने चाहिये. वैन की खिड़कियों में सुरक्षा जाल या ग्रिल का प्रावधान भी बताया गया है. वहीं चालक के अनुभव और वाहन की स्थिति की जांच भी जरूरी है. खबर में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कई वाहनों में इन मानकों का पालन नहीं हो रहा है.

ट्रैफिक पुलिस ने कहा, एक सप्ताह बाद होगी कार्रवाई

ट्रैफिक डीएसपी श्रीनिरज से जब स्कूली वैन में ओवरलोडिंग और पुराने वाहनों के संचालन को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने बताया कि ट्रैफिक पुलिस की ओर से बीच-बीच में अभियान चलाया जाता है और चालकों को हिदायत भी दी गयी है.

उन्होंने बताया कि दो दिन पूर्व एसडीओ की अध्यक्षता में टेंपो और स्कूली वैन चालकों की बैठक हुई थी. इसमें चालकों को एक सप्ताह का समय दिया गया है. इसके बाद विभाग की ओर से कार्रवाई की जायेगी. पुराने स्कूली वैन और टेंपो के खिलाफ भी अभियान चलाने की बात उन्होंने कही.

अभिभावक और स्कूल प्रबंधन भी निभायें जिम्मेदारी

स्कूली बच्चों की सुरक्षा केवल चालक या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है. अभिभावकों को वाहन की स्थिति, चालक के लाइसेंस और वाहन में बैठाये जा रहे बच्चों की संख्या पर नजर रखनी होगी. क्षमता से ज्यादा बच्चे होने पर उन्हें इसका विरोध करना चाहिये.

वहीं स्कूल प्रबंधन को भी अपने परिसर में आने वाले निजी या ठेके वाले स्कूली वाहनों की जांच करनी चाहिये. ओवरलोड या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले वाहनों को स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं देने से भी स्थिति में सुधार लाया जा सकता है. परिवहन विभाग की नियमित जांच और कार्रवाई ही ओवरलोडिंग पर प्रभावी रोक लगाने में मदद कर सकती है.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Shyam narayan jha

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >