जमशेदपुर : टाटा समूह के चेयरमैन पद से एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बाद लोग उनसे जुड़ी यादों को फिर से ताजा कर रहे हैं. बहुत कम लोग जानते हैं कि एन चंद्रशेखरन का जमशेदपुर से भी गहरा रिश्ता रहा है.
उनकी पत्नी ललिता चंद्रशेखरन टाटा स्टील के एक अधिकारी की बेटी हैं. उन्होंने वर्ष 1980 में कॉन्वेंट स्कूल से दसवीं की पढ़ाई पूरी की थी. उस समय उनका परिवार कदमा में रहता था. यही वजह है कि एन चंद्रशेखरन का निजी संबंध भी जमशेदपुर से जुड़ा रहा है.
2017 में संभाली थी टाटा समूह की कमान
जनवरी 2017 में जब एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस की कमान संभाली, तब समूह कई चुनौतियों का सामना कर रहा था. सायरस मिस्त्री विवाद के कारण कॉरपोरेट प्रशासन पर सवाल उठ रहे थे. वहीं, समूह की कई कंपनियां भारी कर्ज के बोझ तले दबी थीं और भविष्य की स्पष्ट रणनीति भी नजर नहीं आ रही थी.
400 अरब डॉलर के समूह में बदला टाटा
चंद्रशेखरन ने अपने कार्यकाल के दौरान आर्थिक अनुशासन को प्राथमिकता दी. इसका परिणाम यह रहा कि वित्तीय वर्ष 2020 में समूह का कुल राजस्व 7.89 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्तीय वर्ष 2026 में बढ़कर 16.24 लाख करोड़ रुपये हो गया.
इसी अवधि में समूह का मुनाफा 32 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1.71 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया.
टाटा मोटर्स को बनाया देश की सबसे बड़ी ईवी कंपनी
वर्ष 2017 में टाटा मोटर्स का पैसेंजर व्हीकल कारोबार लगातार नुकसान में था. बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी पांच प्रतिशत से भी नीचे पहुंच गई थी और कंपनी पर 60 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज था.
चंद्रशेखरन ने इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक पर जोर दिया. इसके बाद टाटा मोटर्स देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी बन गई.
टाटा स्टील का घटाया कर्ज
टाटा स्टील में भी उन्होंने कर्ज कम करने और भारत-केंद्रित क्षमता विस्तार पर विशेष ध्यान दिया. कलिंगनगर फेज-2 पूरा होने के बाद कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता 26.1 मिलियन टन प्रति वर्ष तक पहुंच गई.
वित्तीय वर्ष 2026 में टाटा स्टील का क्रूड स्टील उत्पादन 23.4 मिलियन टन रहा, जबकि शुद्ध कर्ज घटकर 80 हजार करोड़ रुपये रह गया. इसके अलावा यूरोप में हरित स्टील परियोजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ाया गया.
पूंजी अनुशासन और नई तकनीक पर फोकस करते हुए एन चंद्रशेखरन ने टाटा समूह की दो प्रमुख कंपनियों, टाटा स्टील और टाटा मोटर्स के कायाकल्प में अहम भूमिका निभाई.
