जमशेदपुर से संदीप कुमार की रिपोर्ट
Jamshedpur News: कोल्हान विश्वविद्यालय में मंगलवार को कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता की अध्यक्षता में आपात बैठक आयोजित की गई. इसमें झारखंड सरकार की प्रस्तावित क्लस्टर प्रणाली और अंगीभूत कॉलेजों में शिक्षण कार्यक्रमों के पुनर्गठन पर विस्तृत चर्चा हुई. इसमें शैक्षणिक परिषद के सदस्य, विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य, विभागाध्यक्ष और विश्वविद्यालय के पदाधिकारी शामिल हुए.
बैठक में क्लस्टर प्रणाली और विषय संयोजन पर चर्चा
बैठक की शुरुआत प्रभारी कुलसचिव डॉ. रंजीत कुमार कर्ण के प्रेजेंटेशन से हुई, जिसमें क्लस्टर प्रणाली, विषय संयोजन, संकाय संरचना और सीट निर्धारण से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी गई. इसके बाद डीन एकेडमिक डॉ. संजय यादव ने विषयवार प्रस्तुति देते हुए विभिन्न बिंदुओं को स्पष्ट किया.
कॉलेजों के विषय संयोजन पर प्रस्ताव
बैठक में कई कॉलेजों के विषय संयोजन में बदलाव के प्रस्ताव रखे गए. वहीं, जीसी जैन कॉमर्स कॉलेज, जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज, जीएससीडब्ल्यू जमशेदपुर, एलबीएसएम कॉलेज, महिला महाविद्यालय सरायकेला, डिग्री कॉलेज खरसावां सहित जगन्नाथपुर, जुगसलाई, मझगांव, मनोहरपुर, बंदगांव, चाकुलिया, पोटका, गम्हरिया, राजनगर, मॉडल कॉलेज सरायकेला-खरसावां और को-ऑपरेटिव लॉ कॉलेज जमशेदपुर में वर्तमान विषय संयोजन को यथावत रखने का प्रस्ताव भी रखा गया.
किस कॉलेज में क्या बदलाव प्रस्तावित हुआ ?
- टाटा कॉलेज, चाईबासा : मुंडारी के स्थान पर कुरमाली विषय शामिल करने का प्रस्ताव
- महिला कॉलेज, चाईबासा : समाजशास्त्र के स्थान पर हो भाषा शामिल करने पर विचार
- जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज : इतिहास, राजनीति विज्ञान, भूगोल, हिंदी और अंग्रेजी शामिल करने का प्रस्ताव, सीट और संकाय पुनर्विन्यास पर चर्चा
- घाटशिला कॉलेज : समाजशास्त्र के स्थान पर मनोविज्ञान
- एसबी कॉलेज, चांडिल : मानवशास्त्र के स्थान पर संताली
- बहरागोड़ा कॉलेज : मनोविज्ञान के स्थान पर मुंडारी
- जेएलएन कॉलेज, चक्रधरपुर : समाजशास्त्र के स्थान पर कुरमाली
- केएस कॉलेज, सरायकेला : गणित की सीटें और कुरमाली के लिए प्रस्तावित सीटों पर विमर्श
- बहरागोड़ा और जेएलएन कॉलेज : ओड़िया भाषा को टीआरएस से अलग करने का प्रस्ताव
आदिवासी भाषाओं को बचाने की उठी मांग
बैठक में प्रिंसिपलों ने एक गंभीर मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि क्लस्टर प्रणाली के तहत कुछ स्थानीय, आदिवासी और क्षेत्रीय भाषाओं को केवल इसलिए हटाया जा रहा है क्योंकि उनमें नामांकन क्षमता 60 से कम है. प्रिंसिपलों की मांग थी कि क्षेत्र की पहचान, सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय जरूरतों से जुड़े इन विषयों को बनाए रखा जाए. इस पर सहमति बनी कि विश्वविद्यालय सरकार के समक्ष इन विषयों के संरक्षण के लिए अपनी अनुशंसा भेजेगा.
आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए विशेष निर्देश
प्रिंसिपल डॉ. वीणा प्रियदर्शी ने सुझाव दिया कि नामांकन के दौरान आरक्षित वर्ग के कई छात्र जरूरी दस्तावेज नहीं दे पाते, जिससे बाद में परेशानी होती है. इस पर कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता ने निर्देश दिया कि आरक्षित वर्ग के छात्र जाति, आवास और आय प्रमाणपत्र पहले से ही बनवाकर तैयार रखें, जिससे प्रवेश में कोई बाधा न आए.
वेबसाइट और अखबार में दी जाए जानकारी
कुलपति ने सभी प्राचार्यों को निर्देश दिया कि क्लस्टर प्रणाली से संबंधित स्पष्ट दिशा-निर्देश और विषय संयोजन की जानकारी सभी कॉलेजों की वेबसाइट पर अपलोड की जाए. साथ ही इसकी जानकारी समाचार पत्रों के माध्यम से भी प्रकाशित कराई जाए, जिससे छात्र और अभिभावक पूरी तरह अवगत हो सकें. उन्होंने नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले सभी कॉलेजों में हेल्पलाइन संचालित करने का भी निर्देश दिया.
यह भी पढ़ें: धनबाद जेल पहुंचकर रजनी रवानी से मिले सांसद ढुल्लू महतो, सीबीआई जांच कराने की कही बात
यह भी पढ़ें: दो हफ्ते के अंदर जोजोबाटा में लगेगा चापाकल, अधिकारियों के साथ पहुंचे विधायक दशरथ गागराई
