नौ साल पहले सुरक्षा कारणों से ही घाघीडीह जेल के समीप से बदला गया था जलमीनार का स्थल
jamshedpur news :
घाघीडीह इलाके में आदिम संस्कृति व परंपराओं के संरक्षण के लिए ”धुमकुड़िया भवन” निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद बहस छिड़ गयी है. 33.15 लाख रुपये की लागत से बनने वाला यह भवन जनजातीय समाज की भाषा, पूजा-पाठ और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र होगा. जिला प्रशासन ने फंड जारी कर एनआरइपी, पूर्वी सिंहभूम को नोडल एजेंसी बनाया है. निर्माण छह माह में पूरा करने का लक्ष्य है और दो माह में कार्य प्रारंभ होने की संभावना है. मामला इसलिए संवेदनशील है, क्योंकि समीप स्थित घाघीडीह सेंट्रल जेल में कई कुख्यात अपराधी बंद हैं. नौ वर्ष पूर्व जलापूर्ति योजना के तहत प्रस्तावित जलमीनार को जेल प्रशासन की आपत्ति के बाद स्थानांतरित करना पड़ा था. ऐसे में भवन की ऊंचाई, सार्वजनिक आवाजाही और सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं.प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस भवन का डीपीआर स्थानीय लोगों की मांग और जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा पर तैयार हुआ है और निर्माण की नियमित मॉनिटरिंग होगी. अब निगाहें इस पर हैं कि क्या जेल प्रशासन से आवश्यक एनओसी और सुरक्षा आकलन लिया गया है.
