जमशेदपुर से अशोक झा की रिपोर्ट
Jamshedpur Bhalubasa Shop Dispute, जमशेदपुर : लौहनगरी जमशेदपुर के भालूबासा क्षेत्र में साल 2019 से धूल फांक रही 53 टिनशेड दुकानों का मामला एक बार फिर गरमा गया है. अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान बेघर हुए गरीब फुटपाथी दुकानदारों के पुनर्वास के लिए बनी ये दुकानें पिछले छह वर्षों से जेएनएसी (जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति) के फाइलों के चक्रव्यूह में दफन हैं. इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे को लेकर शनिवार को जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र की स्थानीय विधायक पूर्णिमा साहू अचानक पूरे लाव-लश्कर के साथ जेएनएसी कार्यालय पहुंच गईं. विधायक के औचक दौरे से कार्यालय परिसर में हड़कंप मच गया. हालांकि, उस समय नगर आयुक्त अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे और उप नगर आयुक्त कृष्ण कुमार भी जिला उपायुक्त (DC) की एक महत्वपूर्ण बैठक में व्यस्त थे, जिस वजह से विधायक की अधिकारियों से आमने-सामने मुलाकात नहीं हो सकी. अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताते हुए विधायक पूर्णिमा साहू ने तुरंत फोन (दूरभाष) पर उप नगर आयुक्त कृष्ण कुमार से सीधी बात की. उन्होंने कड़े लहजे में अधिकारियों को आड़े हाथों लिया और आगामी सोमवार यानी 22 जून 2026 को जेएनएसी कार्यालय में एक हाई-लेवल (उच्च स्तरीय) समीक्षा बैठक बुलाने का सख्त निर्देश दिया.
अलॉटमेंट के बाद रहस्यमयी तरीके से वापस ले ली गई थीं चाबियां
‘प्रभात खबर’ से विशेष बातचीत करते हुए विधायक पूर्णिमा साहू का गुस्सा साफ नजर आया. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि, “अब इस मामले में प्रशासनिक सुस्ती और जरा भी देरी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.” विधायक ने जेएनएसी परिसर में खड़े होकर अतीत के पन्नों को पलटते हुए एक बड़ा खुलासा किया. उन्होंने बताया कि साल 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल के दौरान स्थानीय प्रभावित दुकानदारों को ये दुकानें बाकायदा अलॉट कर दी गई थीं और उन्हें चाबियां तक सौंप दी गई थीं. लेकिन बाद में जेएनएसी के अधिकारियों ने बेहद रहस्यमयी और अजीबोगरीब तरीके से दुकानदारों से वो चाबियां वापस ले लीं. विधायक ने प्रशासन पर तीखे सवाल दागते हुए पूछा कि आखिर छह सालों से इस जरूरी मुद्दे पर पूरा प्रशासनिक अमला मौन क्यों धारण किए हुए है? इन दुकानों में आज तक बिजली का कनेक्शन क्यों नहीं कराया गया? रख-रखाव के अभाव में आज ये दुकानें पूरी तरह जर्जर और खंडहर होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं, लेकिन सरकारी तंत्र में बैठे किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को इसकी कोई परवाह नहीं है.
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साजिश के कारण सड़क पर आए असली हकदार
विधायक पूर्णिमा साहू ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि जेएनएसी के कुछ लोगों द्वारा गलत और रसूखदार लोगों को ये दुकानें आवंटित करने की पर्दे के पीछे से कोशिश की गई थी. इसी बंदरबांट और धांधली की वजह से पूरा मामला कानूनी और प्रशासनिक विवादों में घिर गया, जिसका खामियाजा यह हुआ कि जो गरीब फुटपाथी दुकानदार इसके असली हकदार थे, वे आज भी सड़क पर ठेला लगाने को मजबूर हैं. उन्होंने साफ किया कि सोमवार (22 जून) को होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में साल 2019 की मूल फाइलों (Original Files) की एक-एक कर बारीकी से स्क्रूटनी (जांच) की जाएगी. जो लोग इस पुनर्वास योजना के असली और वैध हकदार हैं, उन्हें चिन्हित कर तुरंत दुकानें सौंपी जाएंगी. इसके साथ ही, लंबे समय से बंद रहने के कारण खराब हो चुकीं दुकानों की जेएनएसी फंड से मरम्मत भी कराई जाएगी, ताकि गरीब दुकानदार वहां बिना किसी डर के अपना व्यवसाय सुचारू रूप से शुरू कर सकें और अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें.
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