जमशेदपुर : झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रहे मानव-हाथी संघर्ष को रोकने और हाथियों के प्राकृतिक गलियारों को सुरक्षित रखने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. चारों राज्यों में हाथी संरक्षण के लिए करीब 500 करोड़ रुपये की योजना तैयार की जा रही है. इसके तहत प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और संरक्षण व्यवस्था मजबूत करने के साथ हाथी कॉरिडोर को लेकर राज्यों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जायेगा. यह जानकारी जमशेदपुर सांसद विद्युत वरण महतो को केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और वन महानिदेशक सुशील अवस्थी के साथ हुई मुलाकात में मिली. दिल्ली में हुई इस बैठक में चाकुलिया क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष और हाथी कॉरिडोर के साथ-साथ लंबे समय से अटकी धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा.
धालभूमगढ़ एयरपोर्ट की एनओसी पर केंद्र का आश्वासन
सांसद विद्युत वरण महतो ने केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन सौंपकर धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया. उन्होंने बताया - कुछ जरूरी दस्तावेजों की कमी के कारण प्रस्ताव राज्य सरकार को वापस भेजा गया था. इसके बाद करीब 11 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक राज्य सरकार की ओर से संबंधित दस्तावेज केंद्र को उपलब्ध नहीं कराये गये हैं. सांसद ने कहा - उन्होंने हाल में डीएफओ और पीसीसीएफ से भी इस मामले में बातचीत की है. उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि भविष्य में यदि प्रस्ताव की जांच के दौरान कोई दस्तावेज या जानकारी कम पायी जाती है, तो प्रस्ताव को दोबारा वापस भेजने के बजाय सीधे राज्य सरकार से संबंधित दस्तावेज मंगाये जायें. केंद्रीय मंत्री ने इस सुझाव पर सहमति जतायी.
राज्य सरकार से प्रस्ताव मिलते ही होगी एनओसी की प्रक्रिया
बैठक में वन महानिदेशक सुशील अवस्थी से भी एयरपोर्ट को लेकर चर्चा हुई. उन्होंने बताया - पीसीसीएफ झारखंड एटी मिश्रा की ओर से राज्य सरकार के आवश्यक प्रस्ताव और दस्तावेज केंद्र को उपलब्ध कराये जायेंगे. इसके बाद मंत्रालय की ओर से प्रस्ताव का परीक्षण किया जायेगा. जरूरी प्रक्रिया पूरी कर पर्यावरणीय मंजूरी यानी एनओसी देने की कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ायी जायेगी. इस आश्वासन के बाद धालभूमगढ़ एयरपोर्ट को लेकर लंबे समय से चल रही प्रक्रिया के आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है.
चार राज्यों के अधिकारी एक टेबल पर बैठेंगे
बैठक में चाकुलिया और आसपास के क्षेत्रों में हाथी कॉरिडोर से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई. वन महानिदेशक ने बताया कि प्रभावित इलाकों में हाथियों की सुरक्षा और संरक्षण व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है. मानव-हाथी संघर्ष का स्थायी समाधान तलाशने के लिए झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ अधिकारियों की अंतर्राज्यीय समन्वय बैठक जल्द बुलायी जायेगी. इस बैठक में चारों राज्यों के संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे. हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्रों, कॉरिडोर, सुरक्षा व्यवस्था और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के उपायों पर साझा रणनीति तैयार की जायेगी.
वन को पार्क में बदलने की प्रवृत्ति घातक
सांसद विद्युत वरण महतो ने बैठक में वन क्षेत्रों में बढ़ते निर्माण को लेकर भी चिंता जतायी. उन्होंने कहा - जंगलों को पार्क, रिसॉर्ट और गेस्ट हाउस में बदलने की प्रवृत्ति हाथियों के प्राकृतिक आवास और उनके आवागमन के रास्ते के लिए नुकसानदेह है. उन्होंने कहा कि हाथियों के पारंपरिक रास्तों में बाधा आने से मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति पैदा होती है. वन विभाग को यदि पार्क या दूसरी संरचनाएं बनानी हैं, तो इसके लिए परती और टांड़ क्षेत्रों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ताकि जंगल और हाथियों के प्राकृतिक गलियारे प्रभावित न हों. सांसद ने वन क्षेत्रों में अव्यवहारिक निर्माण पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत बतायी.
वन महानिदेशक ने कार्रवाई का दिया भरोसा
सांसद की आपत्तियों पर वन महानिदेशक सुशील अवस्थी ने कहा कि इस तरह के मामलों पर ध्यान दिया जायेगा. प्रभावित क्षेत्रों में संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने की बात भी कही गयी. केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि चारों राज्यों में हाथी संरक्षण के लिए करीब 500 करोड़ रुपये की योजना तैयार की जा रही है. इसके लिए जल्द ही बैठक आयोजित की जायेगी, जिसमें चारों राज्यों के संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. बैठक में हाथी संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष से निपटने के लिए समन्वित रणनीति तैयार की जायेगी, ताकि समस्या का सिर्फ तत्काल नहीं बल्कि दीर्घकालिक समाधान निकाला जा सके.
एक मुलाकात में क्षेत्र के दो बड़े मुद्दे
दिल्ली में हुई इस मुलाकात में एक तरफ धालभूमगढ़ एयरपोर्ट की एनओसी का मुद्दा उठा, तो दूसरी तरफ चाकुलिया समेत कोल्हान के हाथी प्रभावित इलाकों की समस्या केंद्र के सामने रखी गयी. अब नजर राज्य सरकार की ओर से एयरपोर्ट से जुड़े लंबित दस्तावेज केंद्र को भेजने और चारों राज्यों की प्रस्तावित बैठक पर है. इन दोनों प्रक्रियाओं के आगे बढ़ने से एक ओर धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना को गति मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर हाथियों और इंसानों के बीच बढ़ते टकराव को कम करने के लिए साझा कार्ययोजना तैयार होने का रास्ता साफ हो सकता है.
