इंकैब इंडस्ट्रीज : इंकैब के कर्मचारियों के दावे पर ब्रेक, यहां जानें असत्यापित क्लेम का क्या होगा

इंकैब इंडस्ट्रीज (वेदांता) की दिवाला समाधान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब स्वीकृत समाधान योजना को लागू किया जा रहा है. इस अंतिम चरण में, किसी भी नए या पुराने बकाये दावों पर विचार नहीं किया जाएगा, जिससे स्पष्ट हो गया है कि अब केवल मंजूर योजना के अनुसार ही आगे बढ़ा जाएगा.

जमशेदपुर : इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड (अब वेदांता) के कर्मचारियों और लेनदारों के बकाये दावों को लेकर कानूनी स्थिति पूरी तरह साफ हो चुकी है. मामले की देखरेख कर रहे रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) पंकज कुमार टिबरेवाल की लीगल टीम ने दो टूक कहा है कि कंपनी की कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआइआरपी) अब समाप्त हो चुकी है. वर्तमान में सक्षम अदालत द्वारा स्वीकृत समाधान योजना (रेजोल्यूशन प्लान) को धरातल पर लागू किया जा रहा है. इसलिए, कानून के तहत इस अंतिम चरण में किसी भी नये या पुराने क्लेम पर विचार नहीं किया जा सकता. इसकी जानकारी रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) टीम ने कंपनी के एक कर्मचारी को मेल भेज स्थिति स्पष्ट की.

बकाये दावे को किया गया है खारिज

इसमें बताया कि उनके बकाये दावे को खारिज कर दिया गया है. इस पूरे मामले की जानकारी इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (आइबीबीआइ) को भी भेजी है. अब नये दावों पर विचार क्यों नहीं हो सकता? आरपी की लीगल टीम ने साफ किया है कि समाधान योजना मंजूर होने के बाद प्रक्रिया कानूनी रूप से पूरी तरह सील हो चुकी है. अब केवल कोर्ट द्वारा मंजूर की गयी समाधान योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया चल रही है. कानूनन इस मोड़ पर आरपी के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है कि वे किसी नये दावे या सीआइआरपी के दौरान असत्यापित रहे क्लेम पर पुनर्विचार कर सकें. योजना के तहत केवल उन्हीं दावों के आधार पर आगे बढ़ा जायेगा. जो समयसीमा के भीतर विधिवत सत्यापित और स्वीकृत किये जा चुके थे.

पुराने लिक्विडेटर को फॉर्म दिया था - इस दलील पर क्या कहा?

एक कर्मचारी द्वारा पूर्व लिक्विडेटर के पास क्लेम फॉर्म जमा करने का तर्क दिये जाने पर आरपी टीम ने तकनीकी स्थिति स्पष्ट की. कोर्ट (एनसीएलएटी) ने 4 जून 2021 को लिक्विडेशन आदेश को रद्द कर समाधान प्रक्रिया को फिर से शुरू किया था. जब नये आरपी ने कार्यभार संभाला, तो पूर्व अधिकारी से उन्हें लिक्विडेशन अवधि के दौरान जमा हुए दावों का रिकॉर्ड हैंडओवर में नहीं मिला था. इसलिए पुराने लिक्विडेटर को फॉर्म देने भर से नये प्रोसेस में दावा स्वतः मान्य नहीं हो जाता. संबंधित कर्मचारी ने नये आरपी को 12 फरवरी 2022 को आवेदन भेजा था. जिसे अत्यधिक देरी के कारण उसी समय खारिज करने की सूचना दे दी गयी. आरपी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं दावों को सूची में रखी गयी है, जो रिकॉर्ड पर पहले से दर्ज थे या जिन्हें कोर्ट से अलग से विशेष छूट मिली थी.

3 दिसंबर 2025 से शुरू हुई प्रक्रिया

एनसीएलटी से स्वीकृत समाधान योजना के तहत अब तक कर्मचारियों के हित में करीब 45 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है. कंपनी का दावा है कि यह भुगतान राशि सुरक्षित वित्तीय लेनदारों समेत अन्य हितधारकों की तुलना में कहीं अधिक है. तीन दिसंबर 2025 को वेदांता द्वारा इंकैब इंडस्ट्रीज का अधिग्रहण पूरा किये जाने के बाद से ही कर्मचारियों के रिकॉर्ड, दावों और वैधानिक देयों का गहन सत्यापन शुरू किया गया था. सत्यापन के तुरंत बाद ही भुगतान प्रक्रिया शुरू कर दी गयी.

20 करोड़ रुपये के स्वीकृत ग्रेच्युटी दावों का किया जा चुका है भुगतान

लगभग 20 करोड़ रुपये के स्वीकृत ग्रेच्युटी दावों का पूरा भुगतान किया जा चुका है या शेष बचे पात्र कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से जारी किया गया. वेतन संबंधी बकाये का भुगतान दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आइबीसी) की धारा-53 के तहत किया गया है. इसके तहत 7 अगस्त 2019 को सीआइआरपी शुरू होने से ठीक पहले के अंतिम 24 महीनों के पात्र वेतन एवं मजदूरी दावों का निपटारा किया गया है. 616 दावों के आधार पर ही आगे बढ़ेगा काम यूनियन सूत्रों के अनुसार, कोलकाता, पुणे और जमशेदपुर मिलाकर कुल 1,616 केबुल कर्मचारियों के दावे स्वीकृत किये गये हैं. जिनके आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है. बावजूद 400 से ज्यादा कर्मचारी अभी भी दावे से छूटे हुए हैं.

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By अशोक झा

अशोक कुमार झा प्रभात खबर जमशेदपुर में वरीय संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में इनके पास 20 वर्षों से अधिक का एक लंबा, समृद्ध और विविधतापूर्ण अनुभव है.

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