जमशेदपुर: कहावत है कि 'हुनर किसी संसाधन का मोहताज नहीं होता'. इसे सच कर दिखाया है पूर्वी सिंहभूम (घाटशिला प्रखंड) के गालूडीह स्थित चोड़िंदा निवासी सुमन गोप ने. सब्जी बेचने वाले के बेटे सुमन के हाथों में ऐसा जादू है कि वे रद्दी कागजों और बेकार चीजों में भी अपनी कला से जान फूंक देते हैं. 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर सुमन ने महज 2 सेंटीमीटर के रद्दी कागज के टुकड़े पर भगवान गणेश की अद्भुत मिनिएचर (सूक्ष्म) पेंटिंग बनाकर अपनी कलाकारी का लोहा एक बार फिर मनवाया है.
विधायक सोमेश चंद्र सोरेन करेंगे प्रदर्शनी का उद्घाटन
सुमन गोप की इस अनोखी कलाकृति का प्रदर्शन चोड़िंदा पंचायत स्थित बॉयज क्लब के गणेश पूजा पंडाल में किया गया है. इसका औपचारिक उद्घाटन गणेश पूजा के दिन क्षेत्रीय विधायक सोमेश चंद्र सोरेन करेंगे. मिनिएचर पेंटिंग की बात करें तो यह सामान्य चित्रों से काफी छोटी होती है, लेकिन इसमें बारीक और विस्तृत नक्काशी का काम किया जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार भारत में 7वीं से 10वीं शताब्दी के आसपास ताड़पत्रों से शुरू हुई इस प्राचीन कला शैली में सुमन गोप को महारत हासिल है.
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बेकार सामान से गढ़ीं कलाकृतियां
सुमन गोप केवल कागज ही नहीं, बल्कि पेड़ की जड़ों और पुराने गमछों से भी अद्वितीय कलाकृतियां तैयार करते हैं. बीते वर्षों में उन्होंने पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा के दौरान सूती गमछे से मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा बनाई थी, जिसे वहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी काफी सराहा था. इसके अलावा वे पेड़ की जड़ से ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा और रद्दी कागजों से मां सरस्वती की प्रतिमा बना चुके हैं. इससे पहले वे 2 रुपये के पुराने सिक्के पर जमशेदजी टाटा की बेहद बारीक मिनिएचर पेंटिंग बनाकर भी खूब सुर्खियां बटोर चुके हैं.
पिता ट्रेन से जमशेदपुर जाकर बेचते हैं सब्जी
सुमन गोप के पिता पूर्ण चंद्र गोप बेहद सादे माहौल में परिवार का गुजारा करते हैं. वे रोज लोकल ट्रेन से जमशेदपुर और आसपास की ग्रामीण हाट-बाजारों में सब्जी बेचने जाते हैं. आर्थिक तंगी और आधुनिक सुविधाओं के अभाव के बावजूद सुमन ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में आयोजित कला प्रदर्शनी से प्रेरणा लेकर यह विद्या सीखी. महंगी सामग्री खरीदने के साधन न होने पर सुमन ने आसपास फेंकी जाने वाली बेकार चीजों को ही अपनी साधना का जरिया बना लिया.
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