जमशेदपुर: आदित्यपुर-गम्हरिया के शंकरपुर की रहने वाली 40 वर्षीय मालती मार्डी की कहानी संघर्ष और आत्मनिर्भरता की मिसाल है. मालती कभी स्कूल नहीं गईं, लेकिन आज वह कॉरपोरेट कंपनियों के साथ सिविल और इंडस्ट्रियल निर्माण का काम संभाल रही हैं. करीब 20 साल की उम्र में मजदूरी से अपना सफर शुरू करने वाली मालती आज खुद ठेकेदार हैं और अपने सिविल वर्क के जरिए सालभर 10 से 15 मजदूरों को काम देती हैं.
मालती मूल रूप से गम्हरिया के मुदकुम गांव की रहने वाली हैं. उनके पिता मिल्टू मार्डी और मां करमी मार्डी हैं. मजदूरी के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की बारीकियां सीखीं. आज वह मिट्टी की खुदाई, नींव भरने, ईंट जोड़ने, सरिया काटने और वेल्डिंग जैसे कामों को अच्छी तरह जानती हैं. जरूरत पड़ने पर वह खुद कन्नी और बसुली लेकर काम में जुट जाती हैं.
मजदूरी से शुरू किया सफर, आज सिविल वर्क का अपना सेटअप
आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में मालती की अपनी पहचान बन चुकी है. वह कई कंपनियों में बड़े प्लांट के फाउंडेशन और भारी शेड समेत सिविल निर्माण से जुड़े काम सफलतापूर्वक संभाल चुकी हैं. काम में बेहतर फिनिशिंग और तय समय पर काम पूरा करने के कारण कंपनी प्रबंधन उन्हें काम देना पसंद करता है. लगातार काम मिलने के कारण उनके पास काम की कमी नहीं रहती.
मालती कहती हैं, "कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता. जब कभी मिस्त्री काम पर नहीं आते, तो मैं खुद सीमेंट-बालू का मिश्रण बनाकर ईंट जोड़ने लगती हूं. कंपनी प्रबंधन को समय पर काम चाहिए, और मैं उसे पूरा करने के लिए किसी भी हद तक मेहनत करने को तैयार रहती हूं."
जरूरत पड़ने पर खुद थाम लेती हैं कन्नी और बसुली
मालती के लिए ठेकेदारी सिर्फ मजदूरों को काम बांटने तक सीमित नहीं है. साइट पर वह खुद मौजूद रहकर काम की निगरानी करती हैं. धूप हो या बारिश, वह निर्माण स्थल पर पहुंचकर काम की स्थिति देखती हैं और तय समय-सीमा के भीतर प्रोजेक्ट पूरा करने पर जोर देती हैं.
वह कहती हैं, "मैं हर प्रोजेक्ट को तय समय-सीमा के भीतर पूरा करती हूं. धूप हो या बारिश, साइट पर खुद मौजूद रहकर काम की निगरानी करती हूं." मालती की मेहनत से आज उनके साथ 10 से 15 मजदूरों को सालभर काम मिल रहा है.
