जमशेदपुर : सोनारी के दोमुहानी संगम क्षेत्र में नदी तटीय जमीन पर बढ़ते कंक्रीटीकरण और संभावित अतिक्रमण को लेकर सवाल उठने लगे हैं. झारखंड मूलवासी अधिकार मंच के मुख्य संयोजक हरमोहन महतो ने क्षेत्र में बने धार्मिक ढांचों, कंक्रीट घाट, पहुंच मार्ग और अन्य स्थायी निर्माणों की उच्चस्तरीय जांच और संयुक्त स्थल निरीक्षण की मांग की है. उन्होंने उपायुक्त को मांग पत्र सौंपकर जीपीएस लोकेशन, गूगल मैप्स और तस्वीरों के आधार पर पूरे क्षेत्र का सीमांकन कराने की अपील की है.
नदी की जमीन पर किसका कब्जा? उठे सवाल
उपायुक्त को सौंपे शिकायत पत्र में दोमुहानी घाट के नदी तटीय क्षेत्र में मंदिर, कंक्रीटयुक्त घाट, प्राचीन दोमुहानी संगम द्वार और एटमॉस्फियर लाउंज किचन जैसे रेस्टोरेंट भवनों का उल्लेख किया गया है. मंच ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि ये निर्माण किस श्रेणी की भूमि पर किए गए हैं. हरमोहन महतो ने आशंका जताई है कि इन निर्माणों के दौरान सरकारी, सार्वजनिक, गैर-मजरुआ अथवा नदी तटीय (रिवर बैंक) भूमि का अतिक्रमण हुआ हो सकता है. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
सैटेलाइट तस्वीरों से हो जांच
मंच ने राजस्व विभाग, जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति, जल संसाधन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम गठित कर जीपीएस आधारित सर्वेक्षण कराने की मांग की है. साथ ही पुराने खतियान, खेसरा, मौजा नक्शा और सैटेलाइट इमेजरी के जरिए यह पता लगाने की मांग की गई है कि समय के साथ नदी के प्राकृतिक स्वरूप और उसके तटीय क्षेत्र में कितना बदलाव हुआ है.
मिट्टी भराई और बाढ़ क्षेत्र पर भी जांच की मांग
शिकायत में नदी क्षेत्र में मिट्टी भराई, बड़े पैमाने पर कंक्रीटीकरण, बाढ़ क्षेत्र पर इसके संभावित प्रभाव और संबंधित निर्माणों के लिए आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृतियों की भी जांच कराने की मांग की गई है. मंच की ओर से आवेदन की प्रतियां एनजीटी (ईस्टर्न जोन), झारखंड हाईकोर्ट व केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी भेजे जाने की बात कही गई है. अब निगाह प्रशासन की कार्रवाई और प्रस्तावित स्थल जांच पर है.
