'पहले करो रहने का इंतजाम, फिर चलाओ बुलडोजर'...लोगों ने प्रशासन से की मांग

जमशेदपुर के गोविंदपुर में रेलवे लाइन किनारे बसे 50 परिवारों को बेदखली का नोटिस मिला है. ग्रामीणों ने डीसी से उचित पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की है.

जमशेदपुर: गोविंदपुर में रेलवे लाइन के किनारे पिछले 50 से अधिक वर्षों से रह रहे 50 से ज्यादा गरीब परिवारों पर बेदखली का खतरा मंडरा रहा है. दक्षिण पूर्व रेलवे, टाटानगर द्वारा 31 जुलाई को जारी नोटिस के अनुसार इन परिवारों को 15 अगस्त तक अपनी झोपड़ी, मकान और दुकानें खाली करने का निर्देश दिया गया है.

इससे करीब 250 लोग बेघर होने की कगार पर हैं. इस संबंध में सामाजिक सेवा संघ के अध्यक्ष सह झामुमो नेता राजेश सामंत के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल डीसी से मिला और एक मांग पत्र सौंपा. ज्ञापन में कहा गया है कि गोविंदपुर रेलवे लाइन के किनारे रहनेवाले सभी लोग मजदूर, ऑटो चालक और छोटे व्यापारी हैं, जो 1985 से वोटर लिस्ट में दर्ज हैं और नियमित रूप से बिजली, पानी बिल तथा टैक्स दे रहे हैं.

इसलिए उन्हें वहां हटाने से पहले उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाये. प्रतिनिधिमंडल में जितेंद्र ठाकुर, शिवलाल लोहार, रूपम सिंह, छोटे सरदार, राजू दास, लक्ष्मण मुंडा, महेंद्र ठाकुर, नारायण यादव, प्रमोद ठाकुर, सुनीता कुमारी आदि मौजूद थे.


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लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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