वरीय संवाददाता, जमशेदपुर
अगर आप साकची से मानगो या मानगो से साकची की ओर जा रहे हैं और अगर बारिश हो रही हो या हो चुकी हो, तो मानगो छोटे पुल से आवागमन करने से पूरी तरह बचें. बारिश के बाद सुवर्णरेखा नदी पर बने इस छोटे पुल पर जल भराव हो जा रहा है. पानी के तेज बहाव और जल जमाव के बीच सफर करना सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद खतरनाक हो चुका है. किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए बारिश के दौरान मानगो छोटे पुल की बजाय 'जयप्रकाश नारायण सेतु' (नए बड़े पुल) का ही इस्तेमाल करें. स्थानीय लोगों का कहना है कि दशकों पुराने इस पुल की ढलान और ड्रेनेज व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है. बारिश में जलजमाव के कारण पुल के गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे रोजाना हादसे हो रहे हैं.
सड़क जलमग्न
बीच पुल पर बंद हो रहे वाहन बारिश के पानी की सही निकासी न होने की वजह से पूरा पुल तालाब जैसी शक्ल ले लेता है. जलजमाव इतना गहरा हो जाता है कि गाड़ियां पानी के बीच में फंसकर बंद हो जाती हैं. दोपहिया वाहन चालकों के लिए संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है, जिससे फिसलकर गिरने का खतरा बना रहता है. इसके बावजूद मजबूरीवश लोग जान हथेली पर रखकर इस पुल को पार कर रहे हैं.
75-80 साल पुराना है पुल
जानिये इसका इतिहास जमशेदपुर को मानगो से जोड़ने वाले इस पुराने छोटे पुल का निर्माण आजादी से पहले लगभग 1940 के दशक (1945-1950 के आसपास) में हुआ था. यह पुल करीब 75 से 80 साल पुराना हो चुका है. इस ब्रिटिशकालीन पुल पर बढ़ते दबाव और इसकी जर्जर स्थिति को देखते हुए ही वर्ष 1996 में इसके समानांतर जयप्रकाश नारायण सेतु' (नया बड़ा पुल) बनाया गया था.
