बिरसानगर आवास योजना में देरी से भड़के जमशेदपुर के लोग, उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन

Jamshedpur News: जमशेदपुर के बिरसानगर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर का इंतजार कर रहे लाभुकों का गुस्सा फूट पड़ा. छह साल बाद भी परियोजना अधूरी है. लोगों ने जेएनएसी और डीसी ऑफिस के बाहर प्रदर्शन कर घर की चाबी देने की मांग की. प्रशासन पर जल्द समाधान का दबाव बढ़ गया है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

जमशेदपुर से अशोक झा की रिपोर्ट

Jamshedpur News: जमशेदपुर के बिरसानगर में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत घर का सपना देखने वाले हजारों लाभुकों का इंतजार अब नाराजगी में बदल गया है. जिस योजना को दो वर्षों में पूरा कर लोगों को घर सौंपा जाना था, वह छह साल बीतने के बाद भी अधूरी है. शुक्रवार को इसी देरी के खिलाफ लाभुकों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा.

जेएनएसी और डीसी ऑफिस के बाहर जुटान

बड़ी संख्या में महिला और पुरुष लाभुकों ने जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) और उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी समस्याओं को सामने रखा. उनका कहना है कि लंबे समय से सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, लेकिन जमीन पर कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है.

2021 में पूरा होना था काम

इस योजना की शुरुआत 23 फरवरी 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने गुड़िया मैदान, बिरसानगर में शिलान्यास करके की थी. निर्माण कार्य को मार्च 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था. लेकिन तय समय सीमा के पांच साल बाद भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी है, जिससे लाभुकों की उम्मीदें टूटती जा रही हैं.

अब भी फिनिशिंग कार्य में उलझा निर्माण

परियोजना का जिम्मा झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी (जुडको) को दिया गया था. वर्तमान स्थिति यह है कि निर्माण कार्य अब भी फिनिशिंग स्टेज में ही अटका हुआ है. इससे यह साफ है कि परियोजना में भारी लापरवाही और देरी हुई है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है.

अब नहीं चाहिए आश्वासन, चाहिए घर की चाबी: लाभुक

प्रदर्शन कर रहे लाभुकों ने साफ शब्दों में कहा कि अब उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि अपने घर की चाबी चाहिए. उनका कहना है कि वर्षों से किराए के घरों में रहने को मजबूर हैं, जिससे आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है. कई परिवारों ने अपनी जमा-पूंजी इस योजना में लगाई है, लेकिन अब तक उन्हें उसका लाभ नहीं मिल पाया है.

आर्थिक तंगी और बढ़ती परेशानी

लाभुकों ने बताया कि किराया देने के साथ-साथ घर के खर्चों को संभालना मुश्किल हो रहा है. समय पर घर नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है. कई लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द घर आवंटन की मांग की, ताकि वे इस परेशानी से निजात पा सकें.

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प्रशासन पर बढ़ता दबाव

इस विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि वह जल्द से जल्द इस परियोजना को पूरा कर लाभुकों को घर सौंपे. अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने की संभावना है. बिरसानगर आवास योजना में हुई इस देरी ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना होगा कि कब तक लाभुकों का ‘अपना घर’ का सपना पूरा हो पाता है.

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लेखक के बारे में

Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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