जंगल में दुबका है या निकल गया 1 करोड़ का इनामी नक्सली असीम मंडल ?

झारखंड-बंगाल सीमा पर एक महीने से जारी एंटी नक्सल ऑपरेशन के बावजूद एक करोड़ का इनामी नक्सली असीम मंडल पुलिस की पहुंच से बाहर है.

घाटशिला : एक माह से अधिक समय तक झारखंड-बंगाल सीमा पर एंटी नक्सल ऑपरेशन चला. अब भी केशरपुर, भोमराडीह, कालिचती समेत कई जगह पिकेटों में कोबरा के जवान तैनात हैं. समय-समय पर ऑपरेशन चल रहा है. लेकिन, एक करोड़ का इनामी नक्सली असीम मंडल अब तक नहीं मिला. ना ही अब तक उसका पुलिस से आमना-सामाना ही हुआ. 30 से 35 किमी के रेंज में फैले दलमा से घाटशिला के बीहड़ों में असीम मंडल है या फिर पुलिस को चकमा देकर यहां से भाग निकला है, इस पर सस्पेंस बरकरार है.

सारंडा से भागा है असीम मंडल

दरअसल सारंडा से भागकर असीम मंडल अपने साथियों के साथ दलमा फिर घाटशिला की ओर बढ़ा. झाटीझरना के लखाईसीनी में उसके ठहरने की संकेत भी मिले. इसके बाद फिर सुखना पहाड़ पर डेरा जमाने की सूचना भी आयी. इस पर कोबरा बटालियन के जवानों को जंगलों में घुसाया गया. जवानों ने लगातार पहाड़ों की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन चलाया. यहां तक की पुलिस ने पहाड़ों पर बसे कई बीहड़ गांवों में घर-घर तलाशी अभियान भी चलाया. इसमें गुड़ाझोर, मिर्गीटांड़ समेत कई गांव शामिल हैं.

घर में छिपे होने की थी पुलिस को शंका

पुलिस को शंका थी कि कहीं किसी घर में छिप कर तो असीम मंडल नहीं है. पर हाथ कुछ नहीं लगा. न पहाड़ों और बीहड़ों में नक्सलियों का आमना-सामना पुलिस से हुआ न बीहड़ गांवों में. वहीं, स्टेट पुलिस और कोबरा बटालियन के जवान कई टुकड़ियों में बंट कर दलमा से लेकर घाटशिला तक बीहड़ों की घेराबंदी कर लगातार महीनों सर्च ऑपरेशन चलाते रहे. पर अब तक असीम हाथ नहीं आया. हां एक सफलता पुलिस को मिली दलमा के तराई क्षेत्र के पिछले दिनों असीम मंडल के गुट के ही मदन महतो, सागर सिंह और मीना पुलिस के हत्थे चढ़े और उनके हथियार बरामद हुए.

असीम मंडल के साथ सचिन, मीता भी नहीं आये पुलिस के हाथ

असीम मंडल के साथ सचिन उर्फ राम प्रसाद मार्डी, उनकी नक्सली पत्नी मीता, बुलू, समीर उर्फ मंगल महतो और मालती मुर्मू भी पुलिस के हाथ अब तक नहीं लगे हैं. हालांकि, इस टीम के मदन महतो, सागर सिंह और मीना को पुलिस पकड़ने में कामयाब जरूर हुई है.

सरेंडर करने वाले राहुल को लेकर भी बीहड़ों में पुलिस घुसी

खबर है कि बंगाल में 25 जनवरी 2017 को सरेंडर करने वाले सांसद सुनील महतो हत्याकांड के मुख्य शूटर रहे रंजीत पाल उर्फ राहुल को भी पुलिस लेकर बीहड़ों में घुसी पर कोई फायद नहीं मिला. क्योंकि राहुल इस इलाको को जानता है. काफी वर्षों तक इसी इलाके में नक्सली गतिविधि में शामिल था. पर इससे पुलिस को फायदा नहीं मिला.

असीम क्या बीहड़ों में दुबका है, या यहां से निकल अन्यंत्र चला गया ?

महीनों पुलिसिया ऑपरेशन चलने के बाद भी असीम मंडल का पुलिस से सामना नहीं होना इस बात को बल दे रहा कि क्या असीम मंडल, सचिन और अन्य साथी दलमा से घाटशिला के बीच बीहड़ों में अब तक दुबके हैं. या फिर अन्यंत्र चले गये हैं. अगर हैं तो भोजन-पानी कहां से आ रहा. कई ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं जिनका जवाब मिलना अभी बाकी है.


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लेखक के बारे में

By मो. युनूस परवेज

मो. युनूस परवेज वर्ष 1995 से पत्रकारिता कर रहे हैं. उन्होंने घाटशिला महाविद्यालय और रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और राजनीतिक विज्ञान ऑनर्स की डिग्री हासिल की है. इनकी राजनीति, अपराध, नक्सलवाद, खेल, शिक्षा और खेती किसानी की खबरों में विशेष रुचि है. डिजिटल जर्नलिज्म में 5 साल का अनुभव है.

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