समझौता: टाटा स्टील में वर्ल्ड क्लास मेंटेनेंस कॉन्सेप्ट लागू

जमशेदपुर: टाटा स्टील प्रबंधन और यूनियन ने वर्ल्ड क्लास मेंटेनेंस काॅन्सेप्ट को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है. इसके तहत कर्मचारियों को री-ऑर्गेनाइजेशन (आरओ) बेनिफिट मिलेगा. पहले इसका नाम सीएमजी था, जिसे बदलकर डब्ल्यूसीएम यानी वर्ल्ड क्लास मेंटेनेंस कर दिया गया है. शुक्रवार को इससे संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर कर दिये गये. एरिया में […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | May 28, 2016 8:10 AM
जमशेदपुर: टाटा स्टील प्रबंधन और यूनियन ने वर्ल्ड क्लास मेंटेनेंस काॅन्सेप्ट को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है. इसके तहत कर्मचारियों को री-ऑर्गेनाइजेशन (आरओ) बेनिफिट मिलेगा. पहले इसका नाम सीएमजी था, जिसे बदलकर डब्ल्यूसीएम यानी वर्ल्ड क्लास मेंटेनेंस कर दिया गया है. शुक्रवार को इससे संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर कर दिये गये.
एरिया में मैनपावर तय, फील्ड में तत्काल आरओ बेनीफिट : टाटा स्टील में एरिया और फील्ड मेंटेनेंस अलग-अलग तय किया गया है. इसके तहत एरिया में मैनपावर अगर ज्यादा हुआ या किसी को प्रोमोशन मिला तो बेनीफिट मिलेगा, नहीं तो फील्ड मेंटेनेंस वाले कर्मचारियों को आरओ का बेनीफिट निश्चित तौर पर मिलेगा.
मैनेजमेंट : वीपी एचआरएम सुरेश दत्त त्रिपाठी, वीपी शेयर्ड सर्विसेज सुरेश कुमार, चीफ एचआरएम चैतन्य भानु, चीफ ऑफ इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस अमरेंद्र रंजन, चीफ ऑफ मैकेनिकल मेंटेनेंस प्रबल घोष, चीफ एचआरएम स्टील जमशेदपुर संदीप धीर, चीफ ग्रुप आइआर जुबिन पालिया, हेड प्रोडक्टिविटी सर्विसेज डिपार्टमेंट रमाशंकर सिंह व हेड इआर स्टील डीके सिन्हा.
यूनियन : अध्यक्ष आर रवि प्रसाद, डिप्टी प्रेसिडेंट संजीव चौधरी टुन्नू, महामंत्री बीके डिंडा.
फील्ड मेंटेनेंस इलेक्ट्रिकल में ये विभाग होंगे : क्रेन ग्रुप-1, क्रेन ग्रुप-2, हाइटेंशन ग्रुप, इंस्ट्रूमेंटेशन, सप्लाइ ग्रुप, एमइडी इलेक्ट्रिकल सर्विसेज, एमइडी इलेक्ट्रॉनिक सर्विसेज, एमइडी ऑफिस, एमइडी सप्लाइ
फील्ड मेंटेनेंस मैकेनिकल में ये विभाग होंगे : आयरन मेकिंग, स्टील मेकिंग, मिल्स, इंफ्रा व बेल्ट ग्रुप
एरिया-फील्ड मेंटेनेंस के कर्मियों को होगा लाभ
फील्ड मेंटेनेंस : सभी कर्मचारी, जो 1 जनवरी 2016 से कंपनी के पे-रोल पर थे और इस समझौते पर हस्ताक्षर करने की तारीख में पे-रोल पर रहेंगे, वे भी इस पुनर्गठन के कारण होने वाले लाभ के हकदार होंगे.
एरिया मेंटेनेंस : वे कर्मचारी, जो एक ऐसी स्थिति में कार्य कर रहे हैं, जहां विचार-विमर्श के बाद तय मैनपावर की निर्धारित संख्या पर पहुंचा गया है और काम के बोझ में बढ़ोतरी या कम मैनपावर या आवश्यकता से अधिक कौशल के साथ काम करने के परिणाम स्वरूप इस संख्या पर पहुंचा गया है, वे भी इस पुनर्गठन के कारण होने वाले लाभ के हकदार होंगे.