Jamshedpur News : टाटानगर रेलवे स्टेशन से कीताडीह सड़क तक हटा अतिक्रमण, 16 दुकानें तोड़ी गयी
Jamshedpur News : टाटानगर रेलवे स्टेशन से कीताडीह तक जाने वाली मुख्य सड़क किनारे से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुक्रवार से शुरू हो गयी.
11 दुकानों को हाइकोर्ट के आदेश पर सोमवार तक की मिली मोहलत
अभियान के दौरान भारी पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की तैनाती
करीब 200 लोगों के रोजगार पर संकट
रेलवे ने कहा- आगे भी जारी रहेगी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई
Jamshedpur News :
टाटानगर रेलवे स्टेशन से कीताडीह तक जाने वाली मुख्य सड़क किनारे से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुक्रवार से शुरू हो गयी. झारखंड हाइकोर्ट के आदेश और रेलवे प्रशासन के निर्देश पर चलाये गये अभियान में पहले दिन कुल 16 दुकानों को बुलडोजर से तोड़ दिया गया. वहीं 11 दुकानों को सोमवार तक सामान हटाने का अंतिम मौका दिया गया है. सोमवार के बाद इन दुकानों को भी पूरी तरह ध्वस्त कर दिया जायेगा. सुबह करीब 10 बजे से ही रेलवे और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम मौके पर पहुंच गयी थी. अभियान के दौरान मजिस्ट्रेट, आरपीएफ और स्थानीय पुलिस बल की तैनाती की गयी थी, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने. रेलवे के लैंड और इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी भी पूरे अभियान की निगरानी कर रहे थे. कार्रवाई के लिए पांच बुलडोजर तैनात किये गये थे. अंतिम दौर में दुकानदारों को लाउडस्पीकर से घोषणा कर दो घंटे का अतिरिक्त समय दिया गया, ताकि वे अपने सामान सुरक्षित निकाल सकें. इसके बाद एक-एक कर दुकानों को जमींदोज किया गया. प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान किसी बड़े विरोध की स्थिति नहीं बनी, लेकिन दुकानदारों और स्थानीय लोगों में गम और आक्रोश साफ दिख रहा था. हाइकोर्ट में याचिका दायर करने वाले 11 दुकानदारों को फिलहाल राहत मिली है. कोर्ट के निर्देश पर उन्हें सोमवार तक का समय दिया गया है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार सोमवार के बाद इन दुकानों को भी हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी.छत पर चढ़कर किया विरोध, फिर भी टूटी दुकान
अभियान के दौरान कीताडीह मुख्य सड़क के मोड़ पर स्थित “हेलो गुड न्यूज” मोबाइल दुकान के मालिक राजीव प्रसाद और संजीव प्रसाद कार्रवाई के विरोध में दुकान की छत पर चढ़ गये. उन्होंने प्रशासन से कार्रवाई रोकने की मांग की और बुलडोजर के आगे खड़े होकर विरोध जताया. वे लोग कह रहे थे कि उनको भी बुलडोजर से हटा दिया जाये. लेकिन प्रशासनिक दबाव के आगे उनका विरोध काम नहीं आया. इसके बाद उक्त दुकान को भी तोड़ दिया गया.50 साल पुरानी दुकानें भी हुईं ध्वस्त
अतिक्रमण हटाओ अभियान की चपेट में कई ऐसी दुकानें भी आ गयीं, जो लगभग 50 वर्षों से संचालित हो रही थीं. मेडिकल दुकान चलाने वाले संजय सिंह ने भावुक होकर बताया कि यह दुकान उनके पिता के समय से चल रही थी. उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद थी कि रेलवे कहीं न कहीं वैकल्पिक जगह देगा, लेकिन अचानक सब खत्म हो गया. अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. दुकानों के टूटने से केवल मालिक ही नहीं, बल्कि वहां काम करने वाले लगभग 200 कर्मचारियों के सामने भी रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है. दुकानदारों का कहना है कि प्रशासन को पहले वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी.लीज पर ली दुकानों पर भी चला बुलडोजर
कई लोगों ने तो रेलवे से लीज पर जमीन लेकर दुकानें खोली थीं और मार्च महीने तक का किराया भी अग्रिम जमा करा दिया था. जनवरी में ही उनकी भी दुकानें तोड़ दी गयीं. दुकानदारों का कहना है कि उन्हें भरोसा था कि लीज वाली दुकानों को नहीं हटाया जायेगा, लेकिन प्रशासन ने किसी की नहीं सुनी. सामाजिक कार्यकर्ता और बागबेड़ा निवासी सुमंत कुमार ने बताया कि लीजवालों को कम से कम वैकल्पिक दुकानें दी जानी चाहिए थी.अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी रहेगी
रेलवे के लैंड डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई यहीं नहीं रुकेगी. बचे हुए 11 दुकानों के अलावा कई अन्य स्थानों को भी खाली कराया जाना है. इसके लिए सूची तैयार कर ली गयी है और संबंधित लोगों को पहले ही नोटिस दिया जा चुका है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
