ब्रेन डेड व्यक्ति की किडनी, हार्ट और लीवर का ट्रांसप्लांट कर दूसरे लोगों को दें जीवन दान

एक ब्रेन डेड व्यक्ति के विभिन्न अंगों के डोनेट से छह-सात जरूरतमंद व्यक्ति की ���ान बचायी जा सकती है जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल में स्टेटस ऑफ हार्ट ट्रांसप्लांट इन इस्टर्न इंडिया विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता रवींद्र नाथ टैगोर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियक साइंसेस कोलकाता के सीनियर कंसल्टेंट […]

एक ब्रेन डेड व्यक्ति के विभिन्न अंगों के डोनेट से छह-सात जरूरतमंद व्यक्ति की जान बचायी जा सकती है

जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल में स्टेटस ऑफ हार्ट ट्रांसप्लांट इन इस्टर्न इंडिया विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता रवींद्र नाथ टैगोर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियक साइंसेस कोलकाता के सीनियर कंसल्टेंट कार्डियक सर्जन डॉ ललित कपूर मौजूद थे. श्री कपूर ने अपने संबोधन में कहा कि हर साल सड़क दुर्घटना में करीब 1.60 लाख लोग मरते हैं, जिसमें करीब एक लाख लोग ब्रेन डेड होते हैं.
ब्रेन डेड का तात्पर्य है दुघर्टना शिकार व्यक्ति जीवित तो है, लेकिन उसमें शारीरिक एक्टिविटी स्थिर हो चुकी होती है, जिसका कुछ घंटे या दिन जीवित रहने के बाद मरना तय है. इस परिस्थिति में ब्रेन डेड व्यक्ति के शरीर के अंग (किडनी, हार्ट, लंग्स, लीवर आदि) को ट्रांसप्लांट कर दूसरे जरूरतमंद लोगों को जीवन दान दिया जा सकता है.
उन्हाेंने कहा कि झारखंड में कई बड़े अस्पताल शरीर का अंग लेने के लिए सरकार से लाइसेंस ले रहे हैं. फिलहाल कोलकाता को छोड़कर आसपास के कई राज्यों में अस्पताल में अंग का डोनेशन लेने के लिए लाइसेंस नहीं है. उन्होंने कहा कि सालाना एक लाख लोग ब्रेन डेड के शिकार होते हैं, जबकि विभिन्न राज्यों में सुविधाओं का अभाव रहने की वजह से करीब 900 लोगों के ही अंग का उपयोग हो रहा है.
एक ब्रेन डेड व्यक्ति के विभिन्न अंगों के डोनेट से छह-सात जरूरतमंद व्यक्ति की जान बचायी जा सकती है. सरकार के नियम व शर्त के तहत इस तरह के मरीज का अंग लेने के लिए उनके परिजनों की सहमति बहुत जरूरी है. संगोष्ठी से एमजीएम अस्पताल के कई डॉक्टर शामिल हुए और इसका लाभ उठाया.

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