जमशेदपुर : एमजीएम में चार दिनों से डायलिसिस और सीटी स्कैन बंद, भटक रहे मरीज

जमशेदपुर : कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम में पिछले चार दिनों से डायलिसिस और सीटी स्कैन के लिए मरीज भटक रहे हैं. बिजली की समस्या के कारण अस्पताल में मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है. मजबूरी में मरीजों को बाजार में निजी सेंटरों पर जाकर अधिक रुपये देकर जांच करानी पड़ […]

जमशेदपुर : कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम में पिछले चार दिनों से डायलिसिस और सीटी स्कैन के लिए मरीज भटक रहे हैं. बिजली की समस्या के कारण अस्पताल में मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है. मजबूरी में मरीजों को बाजार में निजी सेंटरों पर जाकर अधिक रुपये देकर जांच करानी पड़ रही है.

अस्पताल में लगे केबुल को बदलने के लिए विभाग द्वारा पैसा दिया गया है. इसके बाद भी ऊर्जा विभाग द्वारा इसका कार्य नहीं कराया जा रहा है. दो दिन पहले एमजीएम अस्पताल में बिजली का तार शॉर्ट हो गया था, जिससे कारण अस्पताल में डायलिसिस व सीटी स्कैन बंद हो गया.

अस्पताल के जिम्मेदार भी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते रहे. तार नहीं बदलने से सैकड़ाें मरीज आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हुए. बुधवार को केबुल मिलने के बाद बिजली मिस्त्री द्वारा दूसरे जगह से तार खींचा गया. लेकिन उसकी टेस्टिंग नहीं हो पायी. अब गुरुवार को टेस्टिंग के बाद जांच शुरू हो सकती है.

एमजीएम अस्पताल में बाहर में रंग रोगन, अंदर गिर रहा है प्लास्टर

जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल बने बिल्डिंग के छज्जे व प्लास्टर के लगातार गिरने कारण स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के ए व बी ब्लॉक, इमरजेंसी, ओपीडी बिल्डिंग की मरम्मत कराने के लिए एक करोड़ से ज्यादा राशि उपलब्ध करायी है. वहीं, कार्य कराने का जिम्मा भवन निर्माण विभाग को दिया गया है.

इसके तहत ठेकेदार द्वारा बिल्डिंग में बाहर से पुट्टी कराने के साथ रंग किया जा रहा है. वहीं, दूसरी ओर इमरजेंसी बिल्डिंग के आइसीयू में छत का प्लास्टर टूट कर गिर रहा है. बुधवार को भी आइसीयू में छत का प्लास्टर टूट कर गिरा.
जबकि स्वास्थ्य विभाग के सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी ने निर्देश दिया था कि प्राथमिकता के आधार पर कार्य करना है, जो जरूरी है, उसको पहले उसके बाद ए व बी ब्लाॅक, इमरजेंसी, ओपीडी का कार्य करना है. सचिव ने कहा था कि जहां प्लास्टर टूटा है, उन जगहों पर प्लास्टर हटा उसको फिर से प्लास्टर करके फिर रंग-रोगन करना है, लेकिन ठेकेदार द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा है. बिना प्लास्टर हटाये ही पुट्टी लगाकर रंग दिया जा रहा है.
भवन निर्माण विभाग ने अधीक्षक को नहीं उपलब्ध करायी कार्यों की संपूर्ण विवरणी
स्वास्थ्य सचिव ने भवन निर्माण विभाग को निर्देश देते हुए कहा था कि अस्पताल परिसर में जितने भी कार्य हो रहे हैं, उन कार्यों की संपूर्ण विवरणी अधीक्षक को उपलब्ध कराना है, ताकि अधीक्षक अपने स्तर से कार्यों की मॉनीटरिंग कर सके. लेकिन अभी तक इस संबंध में किसी प्रकार की कोई विवरणी अधीक्षक को उपलब्ध नहीं कराया गया है.
बिल्डिंग जहां भी टूटी है, उस जगह से प्लास्टर झाड़कर फिर से प्लास्टर करना है. उसके बाद रंग रोगन करना है. ठेकेदार द्वारा अगर ऐसा नहीं किया जा रहा है, तो इसकी जांच होगी और ठेकेदार को फिर से उसे बनाना होगा.
शिव शंकर सिंह, जूनियर इंजीनियर भवन निर्माण विभाग

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