जमशेदपुर : भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की दो सदस्यीय टीम गुरुवार को खासमहल स्थित सदर अस्पताल में जांच करने पहुंची. केंद्र सरकार ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए लक्ष्य नाम से एक नयी योजना शुरू की है. पूर्वी सिंहभूम में जच्चा-बच्चा की मौत बड़ी समस्या है. लिहाजा टीम जिले के दौरे पर पहुंची.
टीम ने अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर (ओटी) का निरीक्षण किया. प्रसव के दौरान ओटी में डॉक्टरों की टीम मौजूद नहीं होने पर नाराजगी जतायी. टीम को बताया गया कि अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है. इस वजह से परेशानी हो रही है. टीम ने कहा कि प्रसव के दौरान ओटी में महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के साथ-साथ शिशु रोग विशेषज्ञ भी होने चाहिए.
पूछताछ में टीम को पता चला कि जच्चा-बच्चा की स्थिति गंभीर होने पर दूसरे अस्पताल में रेफर किया जाता है. शुक्रवार को टीम एक बार फिर लेबर रूम का निरीक्षण करेगी. निरीक्षण के क्रम में टीम के सदस्यों ने ओटी को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का निर्देश दिया. टीम ने अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं को भी अपने डायरी में नोट किया. इसके आधार पर अस्पताल की रैकिंग होगी. बेहतर अस्पतालों को पुरस्कार दिया जायेगा. इस अवसर पर जिला आरसीएच पदाधिकारी डॉ. साहिर पाल, सदर अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. वीणा सिंह सहित अन्य चिकित्सक व पदाधिकारी मौजूद रहे.
यह है वर्तमान स्थिति
नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के अनुसार देश में सबसे अधिक बच्चों की मौत जन्म के बाद पहले सप्ताह से लेकर चौथे सप्ताह के दौरान होती है. पहले सप्ताह में 74.1 फीसदी, दूसरे सप्ताह में 12.6, तीसरे सप्ताह 10 व चौथे सप्ताह में 3.1 फीसदी मौतों का आंकड़ा है.
नवजात शिशु मृत्यु की मुख्य वजहों में संक्रमण, समय से पूर्व जन्म जैसी जटिलताओं के अलावा जन्म के समय ढाई किलो से कम वजन, बर्थ एस्फिक्सिया है. सदर में इससे निपटने के संतोषजनक इंतजाम नहीं हैं. प्रसव कक्ष का मूल्यांकन राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक के माध्यम से किया जा रहा है.
