जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल में इलाज कराने के दौरान 12 नवंबर को तिरिंग निवासी सोनाराम पात्रो भाग गया था. वहीं 13 नवंबर को पीसीआर ने उसको भुइयांडीह सड़क किनारे से उठा कर अस्पताल में दोबारा भर्ती करा दिया. इस दौरान उसको पवन मुखी के नाम से भर्ती कराया गया.
इलाज के दौरान 14 नवंबर की सुबह उसकी मौत हो गयी, तो कर्मचारियों ने उसके शव को अस्पताल के शीत गृह में रख दिया. इस बीच उसके परिजन खोज करते हुए एमजीएम अस्पताल पहुंचे, तो कर्मचारियों द्वारा बताया गया कि सोनाराम पात्रो को 12 नवंबर को सड़क दुर्घटना में घायल होने पर 108 एंबुलेंस लेकर आयी थी.
लेकिन इसके बाद वह अस्पताल से भाग गया. उसे खोजने के लिए परिजन एसएसपी अॉफिस समेत अन्य थानाें में घूमते रहे. वहीं, अस्पताल में नाम बदल कर उसका इलाज चलता रहा. सोमवार को किसी ने फोन कर परिजनों को बताया कि सोनाराम का शव एमजीएम अस्पताल में पड़ा है. जब परिजनों ने अस्पताल आकर देखा, तो शव सोनाराम का ही था.
लेकिन रिकॉर्ड में उसका नाम पवन मुखी लिखा था. परिजनों ने उसका नाम पवन मुखी किसने लिखाया, इसकी जांच की मांग करते हुए अस्पताल में हंगामा किया. उसके भाई शिवा पात्रो ने बताया कि पहले कई बार यहां आकर पूछताछ की, लेकिन किसी ने नहीं बताया कि एक शव रखा हुआ है. उसी दौरान दिखा दिया जाता, तो इतनी परेशानी नहीं होती.
सोनाराम की जेब में आई कार्ड, आधार कार्ड सहित अन्य प्रमाण पत्र मौजूद थे. जब परिजनों ने उसका शव लेना चाहा, तो कर्मचारियों ने यह कहते हुए शव देने से इंकार कर दिया कि वह पवन मुखी के नाम से भर्ती था. उसके बाद उसके परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया. इ
सकी शिकायत अधीक्षक से भी की. वहीं अधीक्षक द्वारा इस संबंध में शपथ पत्र देने को कहा, उसके बाद ही शव को दिया जा सकता है. इसकी जानकारी मिलने पर कांग्रेस के नेता राकेश साहू अस्पताल अाकर अधीक्षक से बात की. उसके बाद संबंधित थाना में जाकर शव को दिलाने के लिए कहा, ताकि उस शव का अंतिम संस्कार किया जा सके.
