जमशेदपुर : टाटा मुख्य अस्पताल के चिकित्सक और भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ प्रभात कुमार की हत्या में दोषी करार दिये गये पंकज दुबे और शेख हेसामुद्दीन उर्फ कबीर को जिला जज -13 प्रभाकर सिंह की अदालत ने बुधवार को उम्रकैद की सजा सुनायी है. दोनों पर 60- 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. अदालत ने सोमवार को मामले में दोनों को दोषी करार दिया था. मामले में कोर्ट में अपर लोक अभियाेजक श्याम कुमार महतो ने बहस की थी. 18 लोगों की गवाही करायी गयी थी.
फांसी की सजा मिलती तो अच्छा होता : पत्नी
कोर्ट के फैसले के बाद डॉ प्रभात की पत्नी अनामिका प्रभात ने कहा : उम्मीद थी कि दोनों अपराधियों को फांसी की सजा मिलेगी. ऐसे दरिंदों को जिंदा रहने की कोई जरूरत नहीं है. लेकिन दोनों को आजीवन कारावास की सजा मिली है. कोर्ट के फैसले को स्वीकार करती हूं. उन्होंने पुलिस और सरकार को धन्यवाद भी दिया, कहा: इस प्रकार के खूंखार अपराधियों की जमानत किसी भी कोर्ट से नहीं होनी चाहिए.
अगर ऐसे अपराधियों को हाइकोर्ट से बेल मिल जाती है, तो आज के युवाओं में गलत संदेश जायेगा. डॉ प्रभात एक ऐसे डाॅक्टर थे, जो गरीब मरीजों की मदद मुफ्त में करते थे. उनकी हत्या के बाद गरीबों की परेशानी भी बढ़ गयी है. डॉ प्रभात के इस दुनिया में नहीं रहने से कई गरीब परिवार आज भी इलाज के लिए भटकते हैं.
17 दिसंबर 2009 को की गयी थी हत्या : 17 दिसंबर 2009 की शाम 6.15 बजे पंकज दुबे और कबीर मरीज बन कर डाॅ प्रभात के बंगला नंबर 15, नॉर्दन टॉउन, सी रोड पर आये थे. कॉल बेल बजने पर डाॅ प्रभात की पत्नी अनामिका और बड़ा बेटा शिव बाहर आये. उनसे दोनों ने इलाज कराने की बात कही. दोनों को बैठने को कह कर पत्नी व बेटे अंदर कमरे में चले गये थे.
थोड़ी देर बाद डॉ प्रभात के बाहर आते ही गोली चलने की अावाज आयी. आवाज सुन कर जब पत्नी बाहर आयी, तो डाॅ प्रभात को गिरा हुआ पाया. वह खून से लथपथ थे. पंकज दुबे और कबीर भाग रहे थे. डॉ प्रभात को तत्काल टीएमएच लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
