फर्नीचर काराेबारियाें के 14 ठिकानाें पर पहली बार आयकर सर्वे

जमशेदपुर : आयकर विभाग ने जमशेदपुर में पहली बार फर्नीचर सेक्टर के कारोबारियों का आयकर रिटर्न खंगालना शुरू किया है. अायकर विभाग ने साेमवार काे शहर के चार प्रमुख फर्नीचर व्यवसायियाें के 14 ठिकानाें के कागजात काे खंगालने का काम किया. आयकर विभाग के अपर आयुक्त प्रवीण किशाेर काे जानकारी मिली थी कि उक्त काराेबारियाें […]

जमशेदपुर : आयकर विभाग ने जमशेदपुर में पहली बार फर्नीचर सेक्टर के कारोबारियों का आयकर रिटर्न खंगालना शुरू किया है. अायकर विभाग ने साेमवार काे शहर के चार प्रमुख फर्नीचर व्यवसायियाें के 14 ठिकानाें के कागजात काे खंगालने का काम किया. आयकर विभाग के अपर आयुक्त प्रवीण किशाेर काे जानकारी मिली थी कि उक्त काराेबारियाें का व्यवसाय काफी अधिक फैला हुआ है, लेकिन कर चुकाने के मामले में वे काफी पीछे हैं. इसके साथ-साथ यह भी जानकारी मिली की उनके प्रतिष्ठान की आज तक जांच नहीं की गयी है.
अपर आयकर आयुक्त से मिले निर्देश के बाद आयकर विभाग के उपायुक्त रंजीत मधुकर के नेतृत्व में न्यू फर्नीचर के 10 प्रतिष्ठान, कदमा के बाबा फर्नीचर, बिष्टुपुर के श्रीराम फर्नीचर, साकची के न्यू बाबा फर्नीचर प्रतिष्ठान पर साेमवार काे एक साथ 80 से अधिक पदाधिकारियाें की टीम बनाकर संयुक्त रूप से सर्वे अभियान आरंभ किया गया. विभाग ने दावा किया है कि पहले जहां उक्त फर्नीचर कारोबारी चार से पांच प्रतिशत टैक्स भुगतान करते थे, सर्वे के बाद अब 20-25 प्रतिशत अधिक राजस्व टैक्स के रूप में हासिल हाेगा. आयकर विभाग से मिली जानकारी के अनुसार न्यू फर्नीचर प्रतिष्ठान, जाे पहले 2-3 लाख रुपये पर ही टैक्स चुकाता था, 17-18 वित्तीय वर्ष में 36 लाख रुपये पर टैक्स भुगतान करेगा. न्यू फर्नीचर के खाता की जांच करने पर 62 लाख रुपये के स्टॉक में अंतर पाया गया.
वहीं करीब तीन करोड़ का कारोबार आंका गया है. कदमा के बाबा फर्नीचर की जांच के दाैरान सवा कराेड़ से अधिक का काराेबार बिना कागजात के मिला. पहले सवा दाे लाख रुपये पर टैक्स भुगतान करने के बजाय अब 36 लाख पर टैक्स प्रदान करेगा. बिष्टुपुर स्थित श्रीराम फर्नीचर के प्रतिष्ठान की जांच के दाैरान 20 लाख रुपये के काराेबार में अंतर देखने काे मिला. वह 2017-18 में 50 लाख अाैर 2018-19 में वह 60 लाख रुपये पर टैक्स का भुगतान करने काे तैयार हाे गया.
मानगाे के न्यू बाबा फर्नीचर के मालिक के शहर से बाहर हाेने के कारण उनके काराेबार की गणना नहीं हाे पायी. आयकर अधिकारियाें ने स्टॉक की जांच करने के बाद उसके स्टॉक-सेल-परचेज बुक काे अपने कब्जे में ले लिया है. प्रतिष्ठान के मालिक काे निर्देश दिया गया है कि वे शहर आते ही आयकर विभाग से संपर्क करें. विगत दस वर्षाें से फर्नीचर सेक्टर में आयकर विभाग ने व्यापार की जांच नहीं की थी, जिसका लाभ काराेबारी उठा रहे थे.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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