जमशेदपुर : जाने-माने कथाकार और लेखक अभिषेक कश्यप ने कहा कि चित्र सबसे पहले हमारे भीतर बनता है, बाद में उसकी अभिव्यक्ति कैनवास पर होती है. कदमा स्थित जमशेदपुर स्कूल ऑफ आर्ट के बच्चों और चित्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विजुअल आर्ट में प्रवेश करने के लिए कल्पनाशीलता पहली शर्त है. कलाकार कल्पना को ही रचनात्मक अनुभव में ढालता है.
‘समकालीन दृश्य कला के विविध आयाम’ विषय पर व्याख्यान देने नयी दिल्ली से जमशेदपुर आए अभिषेक की चित्रकारों से बातचीत पर आधारित पुस्तक ‘चित्र संवाद’ अभी हाल में ही प्रकाशित हुई है. वे पिछले कुछ सालों से चित्रकारों की जिंदगी और उनके आर्ट पर काम कर रहे हैं. कई बड़े चित्रकारों के साथ लंबा वक्त गुजार चुके अभिषेक ने कहा कि चित्रकला और फाइन आर्ट महज रंगों और रेखाओं का खेल नहीं है. यह कलाकार की एक समझ भी है जिसे वह कैनवास पर उतार रहा होता है.
इसलिए उसका पढ़ना-लिखना भी जरूरी है. दुनिया के तमाम नामी-गिरामी चित्रकारों का जिक्र करते हुए उन्होंने बच्चों को सलाह दी कि कला के साथ-साथ वे अपनी दुनियावी समझ भी विकसित करें. भारतीय और विदेशी चित्रकारों का उदाहरण देते हुए उन्होंने युवा चित्रकारों को आगाह किया कि वे किसी बड़े कलाकार से प्रेरणा तो लें पर उसकी नकल न करें. अपनी अलग पहचान बनाएं.
अभिषेक कश्यप ने योगेन, रजा, मंजीत बावा, अखिलेश, स्वामीनाथन आदि कई चित्रकारों के संदर्भों का जिक्र करते हुए कहा कि कंटेम्पररी आर्ट में एमएफ हुसैन का बहुत योगदान है. उन्होंने पेंटिंग को स्टूडियो से बाहर निकाला. कला का एक बड़ा समकालीन बाजार निर्मित किया. कार्यक्रम में वरिष्ठ लेखिका डॉ विजय शर्मा, चित्रकार बी शंकर, युवा कहानीकार विश्वंभर मिश्रा आदि भी मौजूद थे.
