हजारीबाग. संभावित सुखाड़ की स्थिति को देखते हुए किसानों को जागरूक करने और आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से शुक्रवार को नगर भवन में जिला स्तरीय खरीफ कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में कृषि, उद्यान, सहकारिता, भूमि संरक्षण विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के विशेषज्ञों ने किसानों को कम पानी में बेहतर उत्पादन की तकनीक बतायी. केवीके गोरियाकर्मा के वैज्ञानिक डॉ राघवन ने कहा कि सुखाड़ की स्थिति में मोटे अनाज, दलहन और तिलहन फसलों की खेती अधिक लाभकारी साबित हो सकती है. उन्होंने कम अवधि वाली अरहर प्रजाति पूसा-16 और बिरसा अरहर-2 अपनाने की सलाह दी. वहीं डॉ मुकेश तिवारी ने वर्षा जल संरक्षण, खेत-तालाब निर्माण तथा टपक व फव्वारा सिंचाई तकनीक पर जोर दिया. कार्यशाला में किसानों को पैक्स सदस्य बनकर अनुदानित दर पर बीज लेने, तालाब जीर्णोद्धार, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, पॉली हाउस और सब्जी खेती जैसी योजनाओं की जानकारी दी गयी. जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि बिरसा बीज विनिमय एवं बिरसा फसल विस्तार योजना के तहत किसानों को 50 से 100 प्रतिशत अनुदान पर बीज उपलब्ध कराये जायेंगे. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान व कृषक मित्र मौजूद थे.
किसानों को दी गयी आधुनिक खेती की जानकारी
किसानों को दी गयी आधुनिक खेती की जानकारी
