हजारीबाग के बड़कागांव में बीमारियों का तांडव: घर-घर में फैला वायरल फीवर और टाइफाइड, CHC में मरीजों की उमड़ी भीड़

हजारीबाग जिले के बड़कागांव में वायरल फीवर, टाइफाइड और मलेरिया का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लगभग हर घर प्रभावित है। बारिश के कारण जलजमाव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है और बीमारियां फैल रही हैं।

बड़कागांव से संजय सागर की रिपोर्ट

हजारीबाग: हजारीबाग जिले के बड़कागांव क्षेत्र में वायरल फीवर, टाइफाइड और मलेरिया का प्रकोप इन दिनों तेजी से बढ़ा है. स्थिति यह है कि क्षेत्र के लगभग हर घर में लोग किसी न किसी बीमारी से पीड़ित हैं. दरअसल, बारिश के मौसम में बड़कागांव के विभिन्न गली-मोहल्लों और मुख्य सड़कों पर जगह-जगह जलजमाव हो गया है, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है और बीमारियों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है. ग्रामीणों का आरोप है कि इस पर काबू पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव नहीं कराया गया है. बड़कागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के मलेरिया पर्यवेक्षक तरुण कुमार ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि 1 जुलाई से अब तक सीएचसी में केवल वायरल बुखार के 460 और टाइफाइड के 460 मरीजों का इलाज किया जा चुका है. इनमें से एक मरीज में मलेरिया की पुष्टि हुई है, जबकि निजी पैथोलॉजी लैब की जांच में 4 अन्य मरीजों में भी मलेरिया पाया गया है. स्वास्थ्य कर्मी शक्ति कमलेश के अनुसार, 30 जुलाई को चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मिट्ठू हालदार ने सीएचसी में अकेले 102 मरीजों का इलाज किया.

फर्जी और अवैध जांच घरों से रहें सावधान

क्षेत्र में बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच बड़कागांव सीएचसी के चिकित्सा प्रभारी डॉ. अविनाश कुमार ने आम जनता से अपील की है कि वे अवैध रूप से संचालित निजी जांच घरों (पैथोलॉजी लैब) में मलेरिया या टाइफाइड की जांच कराने से बचें. उन्होंने चेताया कि कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जहां मरीज को मलेरिया न होने पर भी अवैध जांच घर फर्जी पॉजिटिव रिपोर्ट दे देते हैं. बिना मलेरिया के अगर मरीज को मलेरिया रोधी हैवी दवाइयां दी जाएंगी, तो उसके लीवर पर इसका बेहद बुरा और घातक असर पड़ सकता है. चिकित्सा प्रभारी ने आश्वस्त किया कि बड़कागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हर प्रकार की बीमारियों के इलाज और जांच की पूरी व्यवस्था है. अस्पताल में मलेरिया, टाइफाइड सहित अन्य बीमारियों की जांच के लिए आधुनिक मशीनें और सीबीसी (CBC) मशीन उपलब्ध है, जहां प्रतिदिन मरीजों की जांच कर सही इलाज किया जा रहा है.

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निजी क्लीनिकों में जाने को मजबूर ग्रामीण

सरकारी व्यवस्था के बावजूद बड़कागांव के ग्रामीण व सुदूर इलाकों में कई लोग मजबूरन निजी प्रैक्टिशनरों और निजी क्लीनिकों में अपना इलाज करवा रहे हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुखिया संघ के प्रखंड अध्यक्ष सह सांसद प्रतिनिधि रंजीत कुमार, बड़कागांव मध्य पंचायत के मुखिया मो. तकरीम उल्ला खान और पंचायत समिति सदस्य रितेश ठाकुर ने जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग से गुहार लगाई है. जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि बड़कागांव के सभी गांवों, मोहल्लों और जलजमाव वाले स्थानों पर तुरंत ब्लीचिंग पाउडर तथा डेल्टामैथ्रिन (कीटनाशक) का व्यापक छिड़काव व फॉगिंग कराई जाए ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके.

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By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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