हजारीबाग. जिले के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना का सामाजिक अंकेक्षण शुरू हो गया है. हालांकि, ऑडिट प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि यह निर्धारित तरीके से नहीं हो रहा है.
50-50 स्कूलों का होना है सोशल ऑडिट
राज्य स्तर पर मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण के निर्देश पर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पूरे झारखंड में 50-50 स्कूलों का सोशल ऑडिट कराने का आदेश जारी हुआ है. इसके तहत जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय, हजारीबाग ने सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों को पत्र भेजा है.
पत्र में कहा गया है कि जुलाई 2026 से पहले के रिकॉर्ड की जांच ऑडिट दल करेगा.
भोजन से लेकर वित्तीय रिकॉर्ड तक होगी जांच
सरकार की गाइडलाइन के अनुसार सोशल ऑडिट के दौरान भोजन की नियमितता, गुणवत्ता और मात्रा की जांच की जानी है. इसके अलावा किचन शेड, बर्तन, साफ-सफाई, सुरक्षित खाना पकाने की जगह, अनाज के स्टॉक, भंडारण और परिवहन की भी पड़ताल होगी.
कुकिंग कॉस्ट के खर्च, रसोइया-सहायिका के मानदेय भुगतान, पीने के पानी, हाथ धोने के लिए साबुन, थाली और साफ भोजन कक्ष की व्यवस्था भी जांच के दायरे में होगी.
हाजिरी रजिस्टर, एमडीएम रजिस्टर, वित्तीय रजिस्टर और एमडीएम पासबुक की जांच के साथ एक शिक्षक द्वारा भोजन चखने का रिकॉर्ड, भोजन के दौरान भेदभाव की स्थिति और आपातकालीन मेडिकल प्लान की भी जानकारी ली जानी है.
अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी जरूरी
गाइडलाइन के अनुसार ऑडिट के दौरान अभिभावकों, विद्यालय प्रबंधन समिति और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी जरूरी है. ऑडिट के अंत में ग्राम पंचायत या क्लस्टर स्तर पर जनसुनवाई कर रिपोर्ट पढ़ी जानी है. निर्धारित प्रक्रिया के तहत यह कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठाये जा रहे हैं.
चौपारण में ऑडिट के नाम पर वसूली का आरोप
इधर, ऑडिट के नाम पर हजारीबाग के चौपारण प्रखंड में शिक्षकों से वसूली का आरोप लगा है. बीते 16 सितंबर को चौपारण में प्राथमिक स्कूलों से 1,000 रुपये और मध्य विद्यालयों से 1,800 रुपये ऑडिट के नाम पर लिये जाने की शिकायत शिक्षकों ने की है.
शिक्षकों ने मामले की शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की है. प्रभारी बीईईओ राकेश सिंह ने कहा है कि शिकायत मिली है और मामले की जांच हो रही है.
12 सितंबर की बैठक में भी हुई थी समीक्षा
इधर, जिला शिक्षा पदाधिकारी कुमारी नीलम ने 12 सितंबर की बैठक में एमडीएम, पीएम पोषण योजना और नामांकन की समीक्षा की थी. उन्होंने अधिकारियों को फील्ड में जाकर स्कूलों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया था.
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