खेत में ही छोड़ दिये 300 क्विंटल टमाटर देवनारायण दारू. टमाटर की कीमत में लगातार गिरावट होने से किसानों को काफी नुकसान हुआ है. इससे तंग आकर किसान अपने टमाटर की फसल को खेत में ही छोड़ दे रहे हैं और ग्रामीणों को फ्री में टमाटर ले जाने को कह रहे हैं. पूरे गांव के लोग टमाटर तोड़ने के लिए खेत में पहुंच गये. यह दृश्य दारू प्रखंड के कबिलासी पंचायत के देवरिया गांव का है. सिलवार खुर्द के किसान बासुदेव महतो ने बताया कि देवरिया में करीब 25 एकड़ भूमि लीज पर लेकर टमाटर की खेती की थी. अचानक टमाटर का थोक मूल्य एक रुपये प्रति किलाे हो गया. इस राशि से टमाटर तोड़ने की मजदूरी भी नहीं निकलती. उन्होंने कहा कि करीब 80 क्विंटल टमाटर तोड़ कर खेत में ही रखा हुआ है. लेकिन खरीदारी के लिए व्यापारी नहीं पहुंच रहे हैं. वहीं खेत में करीब 300 क्विंटल टमाटर लगा हुआ है. इस नुकसान से तंग आकर टमाटर को खेत में ही छोड़ दिये और किसानों और ग्रामीणों को ले जाने के लिए फ्री कर दिया. उन्होंने बताया कि चार बेरोजगार साथी रामनाथ, प्रकाश, सुबोध और होरो मिल कर टमाटर की खेती की शुरुआत की थी. इसमें करीब 15 लाख रुपये की पूंजी लगाये थे. वहीं दो लाख रुपये में लीज पर भूमि लिया था. टमाटर का मूल्य नहीं मिलने से पूरा नुकसान हो गया है. कैसे हुआ नुकसान : किसान बासुदेव ने बताया कि हमलोगों के खेत का टमाटर बिहार, सासाराम, गिरिडीह, बंगाल, ओड़िशा समेत कई मंडियों में पहुंचता था. लेकिन सभी मंडियों के आसपास लोकल टमाटर के उत्पादन होने के कारण यहां व्यापारी नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे टमाटर बेकार हो रहे हैं. हजारीबाग जिले के करीब पांच हजार एकड़ भूमि पर टमाटर की खेती किसानों द्वारा की गयी थी. इसमें सैकड़ों किसान जुड़े हुए हैं. टमाटर का मूल्य गिरने से सभी किसानों का भारी नुकसान हुआ है. सुल्ताना, कटकमसांडी, दारू, टाटीझरिया, सदर, इचाक समेत कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर टमाटर की खेती की गयी है.
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