ईरान युद्ध में भारत के पश्चिमी तट का इस्तेमाल करेगा अमेरिका? जानिए वायरल खबर की सच्चाई

Fact Check MEA : क्या ईरान युद्ध में भारत, अमेरिका के साथ खड़ा होगा? इस वायरल खबर की सच्चाई बताते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच इस तरह की कोई बातचीत नहीं हुई है और इससे सावधान रहने की जरूरत है.

Fact Check MEA : क्या अमेरिका ने ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने से पहले भारत से अपने इलाके का इस्तेमाल करने देने की इजाजत मांगी थी? क्या आपने भी यह वायरल खबर पढ़ी है और आपके मन में भी यह शंका है कि अमेरिका ने भारत से अपनी जमीन का उपयोग ईरान के खिलाफ करने देने की बात कही थी, तो आप यह खबर जरूर पढ़ें.

विदेश मंत्रालय ने बताया वायरल खबर का सच

इंटरनेट पर वायरल हुई खबर के बारे में विदेश मंत्रालय ने फैक्टचेक किया है और उस खबर को गलत बताया है, जिसमें यह दावा किया गया है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशन के लिए भारतीय इलाके का इस्तेमाल करने की इजाजत मांगी थी. इस फैक्टचेक को विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट किया है.

कैसे वायरल हुई यह खबर?

सुजान दत्ता नाम के एक पत्रकार ने अपने एक्स हैंडल पर यह दावा किया था कि लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट के तहत अमेरिका भारत के पश्चिमी तट यानी कोंकण के इलाके का उपयोग ईरान पर हमले के लिए करेगा. भारत और अमेरिका के बीच जो समझौता हुआ है उसके तहत दोनों देश एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं (bases, fuel, supplies) का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन वह युद्ध के लिए नहीं है, बल्कि सपोर्ट के लिए है.

हालांकि विदेश मंत्रालय ने इन दावों को खारिज कर दिया और यह स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है. सोशल मीडिया में प्रसारित यह खबर एक फेक न्यूज है, जिससे सावधान रहने की जरूरत है. विदेश मंत्रालय ने एक अलर्ट भी जारी किया जिसमें यह कहा गया है कि सोशल मीडिया पर ऐसे झूठे और बेबुनियाद दावों और पोस्ट से अलर्ट रहें!

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लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट क्या है?

भारत और अमेरिका के बीच 2016 में एक द्विपक्षीय समझौता हुआ था, जिसके तहत यह दोनों देशों की आर्म्ड फोर्सेस को रीफ्यूलिंग, रिपेयर, सप्लाई और आराम के लिए एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकती है. इसके एवज में दोनों देश बाद में इसकी कीमत यानी पैसा भी चुकता करेंगे.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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