क्या खत्म हो जायेगा अभिषेक बनर्जी का राजनीतिक करियर? पढ़ें पूरा विश्लेषण

Abhishek Banerjee Political Future: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आ गये हैं. लगातार 15 साल से सरकार चला रही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सरकार हार रही है. यह चुनाव उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के लिए बेहद अहम थे, क्योंकि दक्षिण बंगाल की कमान उन्हें सौंपी गयी थी. क्या अभिषेक का राजनीतिक करियर खत्म कर देगा यह चुनाव? पढ़ें पूरा विश्लेषण.

Abhishek Banerjee Political Future: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस दोनों के लिए अहम था. सबसे अहम था बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के लिए. अभिषेक के लिए यह अग्निपरीक्षा थी, जिसमें वह फेल होते नजर आ रहे हैं. बंगाल चुनाव 2026 के रुझान बता रहे हैं कि बीजेपी आ रही है, टीएमसी जा रही है.

इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि अभिषेक बनर्जी का अब क्या होगा? उनका पॉलिटिकल करियर क्या खत्म हो जायेगा? राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, तो ये नतीजे केवल यह तय नहीं करेंगे कि राज्य में किसकी सरकार बनेगी, यह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ‘युवराज’ के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट भी साबित होगा.

बुआ ममता बनर्जी की विरासत को पूरी तरह से संभालने के लिए तैयार अभिषेक के लिए यह चुनाव लिटमस टेस्ट था. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, अभिषेक बनर्जी पार्टी के सबसे बड़े रणनीतिकार माने जाते थे. उन्हें इस चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी मिली थी और माना जा रहा था कि अगर टीएमसी लगातार चौथी बार जीती, तो दीदी की जगह ‘भाईपो’ चीफ मिनिस्टर बन सकते हैं, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

अभिषेक ने पार्टी के कई पुराने दिग्गजों की छुट्टी करके युवा चेहरों को टिकट देकर बड़ा जोखिम लिया था. हालांकि, उनका यह फैसला पार्टी पर भारी पड़ गया.

दक्षिण बंगाल (TMC का गढ़) की पूरी जिम्मेदारी अभिषेक के कंधों पर थी. यहां भाजपा और वामपंथ के बढ़ते प्रभाव को रोकना उनकी साख का सवाल था. वह अपनी साख नहीं बचा पाये.

खुद को बेहद आक्रामक नेता के तौर पर पेश करने वाले अभिषेक बनर्जी ने SIR और मतदाता सूची विवाद पर न केवल बीजेपी, बल्कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला था. उनके आक्रामक रुख ने भाजपा के ‘हिंदुत्व’ कार्ड की काट खोजने की कोशिश की, लेकिन मतदाताओं को उनका यह रवैया पसंद नहीं आया.

अभिषेक बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती भाजपा के शुभेंदु अधिकारी हैं. संदेशखाली जैसी घटनाओं के बाद मचे बवाल को शांत करने और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर डैमेज कंट्रोल की कमान अभिषेक ने खुद संभाली थी. भवानीपुर में ममता बनर्जी ने शुभेंदु अधिकारी पर बढ़त बना ली है, लेकिन नंदीग्राम में टीएमसी शुभेंदु को रोकने में नाकाम दिख रही है.

कुल मिलाकर अब तक के परिणाम यह बताते हैं कि अभिषेक ने खुद को जिस तरह से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के रूप में पेश करने की कोशिश की, उसमें वह फेल रहे. उम्मीद की जा रही थी कि वह ममता बनर्जी की जगह लेंगे और बंगाल के नये ‘किंग’ बनकर उभरेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >